ट्रंप डाक मतदान आदेश को लागू करने की कोशिश को अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत से तत्काल राहत नहीं मिली है। गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने निचली अदालत की प्रारंभिक रोक हटाने से इनकार कर दिया। इससे अमेरिकी डाक सेवा फिलहाल उन नए नियमों को लागू नहीं कर सकेगी, जिनके तहत राज्यों को मतपत्र के लिफाफे की डिजाइन पहले संघीय मंजूरी के लिए भेजनी थी और डाक मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करनी थी।
ट्रंप डाक मतदान आदेश पर अपील अदालत ने क्या फैसला दिया
फर्स्ट सर्किट की अपील पीठ ने जिला न्यायाधीश इंदिरा तलवानी द्वारा पिछले सप्ताह जारी प्रारंभिक निषेधाज्ञा को प्रभावी रहने दिया। इस आदेश का सीधा अर्थ है कि अमेरिकी डाक सेवा नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले नई शर्तों का पालन न करने वाले राज्यों के डाक मतपत्रों को रोक नहीं सकती। पीठ ने ट्रंप प्रशासन की वह मांग स्वीकार नहीं की जिसमें अंतिम सुनवाई से पहले रोक को स्थगित करने को कहा गया था।
यह अंतिम फैसला नहीं है कि राष्ट्रपति का आदेश संवैधानिक है या नहीं। अपील अदालत ने अभी केवल यह तय किया है कि मुकदमा चलने और ऊपरी अदालत में आवेदन पर विचार होने तक मौजूदा रोक बनी रहेगी। मामले के कानूनी गुण-दोष पर आगे विस्तृत सुनवाई हो सकती है।
नई डाक शर्तों में क्या था
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 31 मार्च 2026 को चुनावी नागरिकता सत्यापन और अखंडता से जुड़ा कार्यकारी आदेश 14399 जारी किया था। इसके आधार पर अमेरिकी डाक सेवा ने राज्यों से डाक मतपत्रों के वापसी लिफाफे की डिजाइन पहले जांच के लिए भेजने और मतपत्र पाने वाले मतदाताओं की जानकारी एक संघीय ऑनलाइन व्यवस्था में देने की योजना बनाई।
डाक सेवा ने संकेत दिया था कि पूर्व मंजूरी न लेने वाले लिफाफों या उपलब्ध कराई गई सूची से मेल न खाने वाले मतदाताओं के मतपत्र आगे नहीं पहुंचाए जाएंगे। विवाद का एक अहम पहलू यह है कि राज्यों को जिस ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी देनी है, वह अभी सक्रिय नहीं हुआ है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मतदान शुरू होने के करीब ऐसी व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा।
अलबामा, नॉर्थ कैरोलाइना और विस्कॉन्सिन में मतपत्र भेजे गए
अमेरिका के कई राज्यों ने डाक मतपत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अलबामा, नॉर्थ कैरोलाइना और विस्कॉन्सिन में शुरुआती मतपत्र मतदाताओं तक भेजे जा चुके हैं। नवंबर 3 के मध्यावधि चुनाव से पहले अन्य राज्य भी सितंबर में यह प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसलिए अदालत के सामने समय सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन गया है।
ट्रंप डाक मतदान आदेश पर राज्य अधिकारियों का तर्क है कि अंतिम समय में लिफाफों का प्रारूप बदलना, मतदाता सूची को नई संघीय प्रणाली में भेजना और स्थानीय चुनाव कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना अव्यवस्था पैदा कर सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि वैध मतपत्र केवल तकनीकी या प्रशासनिक कमी के कारण रुक सकते हैं और इससे बड़ी संख्या में मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
निचली अदालत ने क्यों लगाई रोक
न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने 4 सितंबर को प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी करते हुए कहा था कि चुनाव से 70 दिन से भी कम समय पहले नियम लागू करने से लाखों डाक मतदाताओं के मताधिकार पर खतरा हो सकता है। आदेश में यह भी कहा गया कि अदालत के सामने प्रस्तुत रिकॉर्ड में तत्काल कठोर व्यवस्था को सही ठहराने वाला डाक मतदान धोखाधड़ी का पर्याप्त प्रमाण नहीं दिया गया।
ट्रंप प्रशासन का पक्ष है कि नई प्रक्रिया चुनाव सुरक्षा मजबूत करेगी, मतदाता पात्रता के सत्यापन में समानता लाएगी और डाक मतपत्रों के संचालन में संघीय मानक तय करेगी। प्रशासन यह भी कहता है कि निचली अदालत ने कार्यपालिका और डाक सेवा की वैधानिक शक्तियों में जरूरत से अधिक हस्तक्षेप किया है।
सुप्रीम कोर्ट में समानांतर सुनवाई
यह विवाद पहले भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। ऊपरी अदालत ने पिछले आदेश को प्रक्रिया से जुड़े आधार पर हटाया था, क्योंकि उस समय डाक सेवा ने लागू करने के लिए अंतिम नियम जारी नहीं किया था। अंतिम नियम आने के बाद राज्यों और मतदान अधिकार समूहों ने नया आवेदन दाखिल किया और न्यायाधीश तलवानी ने दोबारा रोक लगाई। अब ट्रंप प्रशासन ने फिर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
वॉशिंगटन डीसी में डेमोक्रेटिक संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों की एक अलग याचिका भी आदेश को चुनौती दे रही है। इन मामलों में अदालतों को यह तय करना है कि चुनाव संचालन में राज्यों की संवैधानिक भूमिका और डाक सेवा के संघीय अधिकारों की सीमा कहां तक है।
फिलहाल मतदाताओं के लिए क्या स्थिति है
अपील अदालत के ताजा फैसले के बाद मौजूदा राज्य प्रक्रियाओं से जारी किए गए डाक मतपत्रों पर नई संघीय शर्तें फिलहाल लागू नहीं होंगी। मतदाताओं को अपने राज्य के चुनाव विभाग की समयसीमा और निर्देशों का पालन करना होगा। यदि सुप्रीम कोर्ट रोक हटाता है या आगे कोई नया आदेश देता है तो स्थिति बदल सकती है।
ट्रंप डाक मतदान आदेश पर कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ताजा आदेश केवल इतना सुनिश्चित करता है कि मुकदमे के अगले चरण तक डाक सेवा नए प्रतिबंध लागू न करे। अंतिम संवैधानिक प्रश्न, राज्यों की जिम्मेदारी और संघीय सरकार की सीमा पर निर्णय अभी बाकी है।

