प्रीमियर एनर्जीज ने बैटरी ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए जर्मनी के RCT समूह की भारतीय इकाई के साथ साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई प्रीमियर बैटरी टेक्नोलॉजीज ने 10 सितंबर 2026 को RCT एनर्जी इंडिया के साथ एक बाध्यकारी टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए। प्रस्तावित संयुक्त उद्यम तेलंगाना में कुल 12 GWh क्षमता वाली बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) निर्माण इकाई विकसित करेगा। यह बैटरी स्टोरेज प्लांट अक्षय ऊर्जा से बनी बिजली को संग्रहित करने वाले औद्योगिक उपकरणों के डिजाइन, निर्माण और बिक्री पर केंद्रित होगा।
पहले चरण में 6 GWh का संयंत्र
योजना के अनुसार निर्माण सुविधा सीतारामपुर, तेलंगाना में स्थापित की जाएगी। इसका पहला चरण 6 GWh क्षमता का होगा और इसे वित्त वर्ष 2027-28 में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी परियोजना की प्रस्तावित क्षमता 12 GWh है। फिलहाल कंपनी ने उत्पादन शुरू होने की निश्चित तारीख, परियोजना लागत और चरणवार निवेश का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए 12 GWh को अंतिम चालू क्षमता के बजाय घोषित योजना के रूप में समझना उचित होगा।
संयुक्त कंपनी में किसकी कितनी हिस्सेदारी
यह साझेदारी प्रीमियर एनर्जीज स्टोरेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आगे बढ़ेगी। प्रस्तावित ढांचे में प्रीमियर बैटरी टेक्नोलॉजीज की 85 प्रतिशत और RCT एनर्जी इंडिया की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। RCT इंडिया को आगे पांच प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी लेने का विकल्प भी दिया गया है। इस विकल्प के इस्तेमाल पर दोनों पक्षों की हिस्सेदारी क्रमशः 80 प्रतिशत और 20 प्रतिशत हो सकती है।
दोनों कंपनियों ने टर्म शीट पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर शेयरधारक समझौते सहित जरूरी अंतिम करार करने का प्रयास करने पर सहमति जताई है। बोर्ड की संरचना, पक्षों की जिम्मेदारियां, पूंजी व्यवस्था और विभिन्न पड़ावों की समयसीमा इन समझौतों में अधिक स्पष्ट होगी।
बैटरी स्टोरेज की जरूरत क्यों बढ़ रही है
सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम तथा दिन के समय के साथ बदलता रहता है। BESS इकाइयां अधिक उत्पादन वाले समय में बिजली संग्रहित करके जरूरत के समय ग्रिड या उपभोक्ता को उपलब्ध करा सकती हैं। इससे अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की आपूर्ति अधिक स्थिर बनाने, ग्रिड को संतुलित रखने और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बैकअप क्षमता तैयार करने में मदद मिलती है।
प्रस्तावित संयंत्र वाणिज्यिक, औद्योगिक और बड़े बिजली नेटवर्क से जुड़ी परियोजनाओं के लिए बैटरी स्टोरेज समाधान तैयार करेगा। कंपनियां घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भी लक्ष्य बना रही हैं और इस इकाई को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना रखती हैं।
सौर निर्माण से ऊर्जा भंडारण तक विस्तार
प्रीमियर एनर्जीज का मौजूदा मुख्य कारोबार सौर सेल और मॉड्यूल निर्माण से जुड़ा है। नई साझेदारी से कंपनी अपनी पेशकश को ऊर्जा भंडारण तक बढ़ाना चाहती है। प्रस्तावित व्यवस्था में भारतीय पक्ष की विनिर्माण क्षमता और RCT समूह का इंजीनियरिंग अनुभव, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति नेटवर्क तथा परियोजना निष्पादन क्षमता एक साथ लाने की बात कही गई है।
कंपनी ने इससे पहले भी अपनी दीर्घकालिक योजना में 12 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने का लक्ष्य बताया था। नया टर्म शीट उस रणनीति को साझेदारी के औपचारिक ढांचे में आगे बढ़ाता है। हालांकि उत्पादन, बिक्री और वित्तीय असर का आकलन अंतिम समझौतों, पूंजीगत खर्च, नियामकीय मंजूरियों और संयंत्र के समय पर चालू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब आगे किन बातों पर नजर रहेगी
अगले महत्वपूर्ण पड़ाव में अंतिम शेयरधारक समझौता, परियोजना का वित्तपोषण, उपकरण और तकनीक की व्यवस्था, निर्माण समयसीमा तथा पहले 6 GWh चरण की वास्तविक कमीशनिंग शामिल हैं। टर्म शीट बाध्यकारी है, लेकिन यह अपने आप पूर्ण उत्पादन की गारंटी नहीं देता। इसलिए निवेशकों और उद्योग के लिए आगामी कॉरपोरेट खुलासे परियोजना की प्रगति समझने का प्रमुख आधार होंगे।


