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निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और रोजगार पर जोर, मुंबई में राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और कौशल प्रशिक्षण को दर्शाता सांकेतिक चित्र

मुंबई: निर्माण श्रमिकों को कल्याण योजनाओं और रोजगार से बेहतर ढंग से जोड़ने के उपायों पर केंद्र तथा राज्यों ने मुंबई में विचार किया। 11–12 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में कामगारों के कौशल, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए

रोजगार और सुविधाओं तक पहुंच के अलग-अलग तरीकों पर प्रस्तुतियां हुईं। राजस्थान ने डिजिटल लेबर चौक का अनुभव रखा, जबकि बिहार ने श्रम सेवा सुविधा केंद्रों की जानकारी दी। असम ने निर्माण सखी पोर्टल और उत्तर प्रदेश ने भवन निर्माण कामगारों के कौशल विकास पर अपना काम प्रस्तुत किया। इन अनुभवों पर अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने चर्चा की।

प्रवासी कामगारों की जरूरतों पर ध्यान

श्रम एवं रोजगार सचिव ने कहा कि योजनाएं बनाते समय कामगारों के एक राज्य से दूसरे राज्य और विदेश जाने की स्थिति का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने रोजगार तलाशने वालों और नियोक्ताओं के बीच संपर्क सुधारने तथा जानकारी और सेवाओं तक पहुंच की बाधाएं कम करने की जरूरत बताई। कार्यस्थल की शारीरिक सुरक्षा और पेशागत स्वास्थ्य पर भी जोर दिया गया।

सम्मेलन में कल्याण बोर्डों की भूमिका, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और श्रम संबंधी डिजिटल व्यवस्था पर अलग सत्र हुए। केंद्र और राज्यों के बीच नियमित संवाद तथा सफल अनुभवों के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने की बात रखी गई। यह सम्मेलन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार ने मिलकर आयोजित किया था।