पूरा भारत · हिन्दी
▤   पूरा भारतदेश की आवाज़पूरी तस्वीरराष्ट्रीय संस्करण
⌖ पूरा भारत

BRICS अनाज कारोबार मंच पर काम जारी, किसानों के लिए नियम अभी तय नहीं

अनाज व्यापार और कृषि बाजार का सांकेतिक दृश्य

BRICS देशों ने अनाज कारोबार के लिए साझा मंच बनाने की पहल पर काम जारी रखने का संकेत दिया है। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की घोषणा में रूस समर्थित ग्रेन एक्सचेंज के विचार का जिक्र है। अभी मंच शुरू नहीं हुआ है और किसानों के लिए उस पर सीधे बिक्री की व्यवस्था या नई कीमत लागू होने की घोषणा नहीं हुई है।

प्रस्ताव का मकसद क्या है?

सदस्य देशों के बीच अनाज की खरीद-बिक्री और बाजार जानकारी को अधिक व्यवस्थित करना इस पहल का घोषित उद्देश्य है। वैश्विक आपूर्ति में रुकावट और कीमतों के तेज उतार-चढ़ाव के समय साझा कारोबार व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। हालांकि मंच की बनावट, नियम, भाग लेने वाले व्यापारी, कीमत तय करने का तरीका और भुगतान व्यवस्था अभी तय होना बाकी है। इन शर्तों के बिना भारतीय किसान को संभावित भाव या लाभ बताना जल्दबाजी होगी।

रूस की समयसीमा, साझा फैसला नहीं

रूस इस पहल का समर्थक रहा है और 2026 में परीक्षण तथा 2027 तक अधिक व्यापक संचालन की योजना का उल्लेख हुआ है। ये प्रस्तावित लक्ष्य हैं; BRICS की ओर से निश्चित शुरूआती तारीख या पूर्ण संचालन की पुष्टि नहीं हुई। मौजूदा अनाज मंडियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य और निर्यात नियमों में भी इस चर्चा से तत्काल कोई बदलाव नहीं होता।

खेती से जुड़े दूसरे मुद्दे

समूह की कृषि चर्चा में उर्वरक आपूर्ति, बीज, भंडारण और जलवायु जोखिम पर सहयोग की बात भी उठी है। जून में कृषि मंत्रियों की बैठक में किसान-केंद्रित AGRIN नेटवर्क और अनाज मंच के संचालन पहलुओं पर विचार हुआ था। अगले चरण में लिखित नियम और सदस्य देशों की भागीदारी स्पष्ट होने पर ही यह तय हो सकेगा कि अनाज उत्पादकों, व्यापारियों और खाद्य आपूर्ति को कितना व्यावहारिक लाभ मिलेगा। किसानों को अभी अपने स्थानीय मंडी नियम और अधिकृत खरीद सूचना के आधार पर ही बिक्री की योजना बनानी चाहिए।