मेरठ के मवाना क्षेत्र के किसान नंदकिशोर ने फार्म मशीनरी बैंक के तहत खरीदे यंत्रों को अपनी खेती के साथ आसपास के खेतों में किराये पर चलाना शुरू किया है। उनका कहना है कि इससे साल भर में लगभग ₹4–5 लाख की अतिरिक्त आमदनी होती है। यह उनका बताया सकल अतिरिक्त आय का आंकड़ा है; ईंधन, रखरखाव, किस्त और अन्य खर्च घटाने के बाद शुद्ध लाभ कितना है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
छह एकड़ खेती और मशीनों की सेवा
नंदकिशोर करीब छह एकड़ में मुख्यतः आलू और गन्ना उगाते हैं। उनके पास ट्रैक्टर, बेलर, सुपर सीडर, गेहूं कटाई की मशीन और गहरी जुताई का यंत्र है। परिवार के मुताबिक अपने खेत में पहले दो दिन लगने वाला कुछ काम अब एक दिन में पूरा हो जाता है। शेष समय में मशीनें दूसरे किसानों को उपलब्ध कराकर वे किराये की कमाई करते हैं। अलग-अलग खेत और फसल में समय की बचत समान होगी, ऐसा मानना ठीक नहीं है।
अनुदान की बताई गई राशि
किसान ने मशीनों की कुल खरीद लगभग ₹42 लाख बताई है। उनके विवरण में करीब ₹30 लाख की योजना पर लगभग 80 प्रतिशत, यानी करीब ₹24 लाख, अनुदान मिलने की बात भी है। कुल खरीद मूल्य, स्वीकृत परियोजना लागत और अनुदान योग्य हिस्से अलग हो सकते हैं; इन आंकड़ों को हर किसान के लिए तय सब्सिडी न समझें। योजना की सीमा और पात्रता मशीन, आवेदन श्रेणी तथा मंजूरी पर निर्भर है।
साझा मशीन से छोटे खेतों को सुविधा
नंदकिशोर की पत्नी सीमा ने कहा कि मशीनें आने से बुवाई और जुताई के लिए अलग-अलग सेवा बुलाने की जरूरत घटी है। फार्म मशीनरी बैंक का व्यावहारिक लाभ तभी बढ़ेगा जब आसपास के किसान समय पर मशीन पा सकें और किराया स्पष्ट हो। इच्छुक किसानों को खरीद से पहले जिला कृषि कार्यालय में वर्तमान अनुदान दर, मशीन सूची, आवेदन और ऋण की शर्तों की पुष्टि करनी चाहिए। इस परिवार का अनुभव संभावित मॉडल दिखाता है, सुनिश्चित कमाई नहीं।



