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चंदौली में धान के खेतों की निगरानी बढ़ाएँ: म्यान के धब्बे और सूखी कोंपल हैं संकेत

बारिश के बाद हरे खेत में खड़ा किसान, सांकेतिक दृश्य

चंदौली, 14 सितंबर 2026। लगातार बारिश के बाद धान के खेतों में नमी बढ़ने पर फसल की नियमित निगरानी जरूरी हो गई है। कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली ने किसानों को शीथ ब्लाइट, जीवाणु झुलसा और तना छेदक के शुरुआती संकेत पहचानने की सलाह दी है। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र रघुवंशी के अनुसार, जलभराव और यूरिया का असंतुलित इस्तेमाल रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हर खेत में संक्रमण हुआ है, ऐसा दावा नहीं किया गया है।

निचली म्यान पर धब्बे और पत्तियों के किनारे देखें

शीथ ब्लाइट में पानी की सतह के पास पौधे की निचली पत्ती की म्यान पर हरे-भूरे या कत्थई धब्बे दिख सकते हैं। केंद्र के मुताबिक अधिक नमी में यह फफूंद रोग फैलने के अनुकूल स्थिति बनती है। दूसरी ओर, जीवाणु झुलसा में पत्ती पहले धूसर-हरी होकर मुड़ सकती है और बाद में किनारों पर पीले या भूसे जैसे धब्बे दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में पत्ती सूखती है और बालियों तथा दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. अभयदीप गौतम ने अतिरिक्त पानी निकालने और नत्रजन खाद जरूरत से ज्यादा न देने पर जोर दिया है।

बीच की कोंपल सूखे तो तने की जाँच करें

तना छेदक का प्रकोप शुरुआती अवस्था में पौधे की बीच वाली कोंपल को पीला और सूखा कर सकता है। प्रभावित कोंपल खींचने पर आसानी से निकल सकती है। बाली निकलने के समय हमला हो तो सफेद, दाने रहित बालियाँ दिखाई दे सकती हैं। तने में छोटा छेद या उसके आसपास बुरादा भी संकेत हो सकता है। केंद्र के विशेषज्ञ रितेश सिंह गंगवार ने ऐसे लक्षणों के लिए नियमित खेत निरीक्षण की सलाह दी है। केवल एक लक्षण देखकर दवा चुनने के बजाय स्थानीय विशेषज्ञ से रोग या कीट की पहचान की पुष्टि कराना उपयोगी होगा।

किसान अभी क्या करें

जहाँ पानी लगातार खड़ा है, वहाँ निकासी की व्यवस्था करें और खेत के प्रभावित हिस्सों को अलग से देखें। संतुलित पोषण बनाए रखें; ज्यादा यूरिया डालकर फसल को जल्दी बढ़ाने की कोशिश जोखिम बढ़ा सकती है। किसी रसायन का इस्तेमाल फसल के लिए स्वीकृत लेबल, सही मात्रा और सुरक्षा निर्देश देखकर तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। अलग-अलग दवाएँ बिना सलाह मिलाकर न छिड़कें। केंद्र ने स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज उपयोग करने और रोगग्रस्त खेत से बीज न लेने की भी सलाह दी है। चंदौली के किसान कृषि विज्ञान केंद्र, बिछिया कला में सीधे सलाह ले सकते हैं। बारिश की आगे की संभावना के लिए राज्यवार मौसम पूर्वानुमान भी देखें।