नई दिल्ली, 17 सितंबर। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने यमुना और राजधानी के दूसरे जलाशयों में मूर्ति विसर्जन पर रोक के निर्देश जारी किए हैं। विसर्जन केवल उन स्थानों पर हो सकेगा जिन्हें स्थानीय निकाय या संबंधित प्राधिकरण तय करेंगे। नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये पर्यावरण मुआवजा देना पड़ सकता है।
निर्देश गणेश उत्सव और आगामी दुर्गा पूजा को देखते हुए जारी किए गए हैं। समिति ने कहा है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों और रासायनिक रंगों से जल गुणवत्ता पर असर पड़ता है। रंगों में पारा, क्रोमियम, लेड और कैडमियम जैसे तत्व हो सकते हैं, जो जलीय जीवन और लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं।
शहरी स्थानीय निकायों को कहा गया है कि वे आबादी और कॉलोनियों के पास अस्थायी कृत्रिम तालाब बनाएं। जिला मजिस्ट्रेटों को नियम लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है। नगर निकाय और दिल्ली पुलिस उन वाहनों पर भी नजर रखेंगे जो प्रतिबंधित मूर्तियाँ लेकर दिल्ली में प्रवेश करते हैं।
लोगों और पूजा समितियों से अपील की गई है कि वे घर, सोसायटी या पार्क परिसर में बाल्टी या अस्थायी कृत्रिम तालाब में विसर्जन करें। विसर्जन से पहले फूल और कागज की सजावट अलग करने तथा जैविक और अजैविक कचरे का अलग निपटान करने को भी कहा गया है।
समिति विसर्जन से पहले, दौरान और बाद में पानी की गुणवत्ता की जाँच करेगी। संबंधित एजेंसियों से सितंबर और अक्टूबर में साप्ताहिक कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा गया है।