महिंद्रा फाइनेंस ने निजी प्लेसमेंट के जरिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर यानी NCD जारी कर अधिकतम ₹2,000 करोड़ जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। कंपनी की डिबेंचर निर्गम समिति ने 24 सितंबर 2026 को इसकी शर्तें स्वीकृत कीं। प्रस्तावित ऋण प्रतिभूतियों पर 7.95% सालाना निश्चित कूपन रखा गया है। निर्धारित आवंटन तारीख 29 सितंबर है; इसलिए आज की घोषणा को पूरी रकम जुट जाने की सूचना नहीं समझना चाहिए।
महिंद्रा फाइनेंस का मूल निर्गम ₹1,000 करोड़
योजना में ₹1,000 करोड़ का मूल निर्गम और अतिरिक्त ₹1,000 करोड़ का ग्रीनशू विकल्प शामिल है। इस विकल्प से निर्गम का आकार तय सीमा तक बढ़ाया जा सकता है। कुल दो लाख तक डिबेंचर जारी करने का प्रस्ताव है और प्रत्येक का अंकित मूल्य ₹1 लाख होगा।
यह फैसला बोर्ड से अधिकृत समिति ने शेयरधारकों की मंजूर समग्र उधारी सीमा के भीतर लिया है। प्रस्तावित सीरीज का नाम AE2026 है। इसे सुरक्षित, रेटिंग प्राप्त, सूचीबद्ध और तय अवधि पर भुनाए जाने वाले NCD के रूप में जारी किया जाना है। निजी प्लेसमेंट होने के कारण इसे आम जनता के लिए खुले नए सार्वजनिक निर्गम की तरह पेश नहीं किया गया है।
| मुख्य शर्त | घोषित विवरण |
|---|---|
| अधिकतम निर्गम आकार | ₹2,000 करोड़ |
| मूल निर्गम और अतिरिक्त विकल्प | ₹1,000 करोड़ + ₹1,000 करोड़ |
| प्रति डिबेंचर अंकित मूल्य | ₹1 लाख |
| निश्चित सालाना कूपन | 7.95% |
| निर्धारित आवंटन | 29 सितंबर 2026 |
| परिपक्वता | 28 सितंबर 2029 |
ब्याज और मूलधन का भुगतान कब होगा
डिबेंचर की अवधि निर्धारित आवंटन से 1,095 दिन रखी गई है। भुगतान कार्यक्रम में 29 सितंबर 2027 और 29 सितंबर 2028 को प्रत्येक डिबेंचर पर ₹7,950 का कूपन है। आखिरी कूपन 28 सितंबर 2029 को ₹7,928.22 होगा। उसी दिन प्रति डिबेंचर ₹1 लाख मूलधन लौटाने का कार्यक्रम है।
जमा की जाने वाली रकम इलेक्ट्रॉनिक बोली मंच पर तय बोली मूल्य के आधार पर होगी। इसका अर्थ है कि घोषित 7.95% कूपन और किसी खरीदार की वास्तविक खरीद कीमत से निकलने वाली प्रतिफल दर को एक ही चीज नहीं माना जा सकता। सूचीबद्ध करने के लिए BSE के होलसेल डेट मार्केट सेगमेंट का प्रस्ताव दिया गया है।
सुरक्षा के लिए संपत्तियों पर अधिकार बनाया जाएगा
कंपनी ने बकाया डिबेंचर राशि के 1.1 गुना तक संपत्तियों पर डिबेंचर ट्रस्टी के पक्ष में विशेष अधिकार बनाने की शर्त रखी है। इसमें ऋण अनुबंधों, हायर परचेज और लीज से जुड़ी वर्तमान या भविष्य की प्राप्तियां, स्वामित्व वाली संपत्तियां और बही ऋण शामिल हो सकते हैं। संबंधित संपत्तियां पहले से किसी भार से मुक्त होनी चाहिए।
मंजूरी के बाद अगला अहम चरण आवंटन है। उससे वास्तविक निर्गम आकार और जुटाई गई रकम स्पष्ट होगी। फिलहाल उपलब्ध घोषणा निर्गम की स्वीकृत सीमा, ब्याज और भुगतान कार्यक्रम बताती है।

