GST नियमों में 1 नवंबर 2026 से वस्तुओं के कुछ कारोबारों के लिए नए अनुपालन प्रावधान लागू हुए हैं। इनका असर खास तौर पर स्क्रैप की खरीद-बिक्री और ऐसे पंजीकृत कारोबारों पर है जो अधिसूचित वस्तुओं के सौदे करते हैं। बदलावों को समझते समय विक्रेता की पंजीकरण स्थिति और खरीदार की जिम्मेदारी अलग-अलग देखना जरूरी है।
किन वस्तुओं पर बदली व्यवस्था
नए प्रावधानों में धातु स्क्रैप, प्लास्टिक कचरा और स्क्रैप, पुराने टायरों का स्क्रैप, इलेक्ट्रॉनिक कचरा तथा प्रयुक्त खाद्य तेल जैसी अधिसूचित श्रेणियां शामिल हैं। इन वस्तुओं की खरीद में पंजीकृत खरीदार पर रिवर्स चार्ज के तहत कर चुकाने की जिम्मेदारी आ सकती है, खासकर जब आपूर्तिकर्ता पंजीकृत न हो। इसलिए केवल बिल जारी करने वाले पक्ष की स्थिति देखकर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं; खरीदार को माल की श्रेणी और सप्लायर का GST पंजीकरण भी जाँचना होगा।
2% TDS कब कटेगा
अधिसूचित वस्तुओं की पंजीकृत से पंजीकृत आपूर्ति पर लागू शर्तें पूरी होने पर खरीदार को भुगतान के समय 2 प्रतिशत GST TDS काटना होगा। यह सामान्य आयकर TDS से अलग व्यवस्था है। कटौती करने वाले कारोबार को निर्धारित रिटर्न में इसका हिसाब देना और संबंधित प्रमाणपत्र जारी करना होगा। हर स्क्रैप बिल पर यह कटौती स्वतः लागू नहीं होती: लेन-देन, पक्षों की पंजीकरण स्थिति और अधिसूचना में वर्णित वस्तु का मिलान जरूरी है।
छोटे विक्रेता के लिए अहम फर्क
नियमों का अर्थ यह नहीं है कि हर छोटा या असंगठित स्क्रैप विक्रेता बिना सीमा के तुरंत GST पंजीकरण कराए। पंजीकरण की सामान्य कारोबार-सीमा और लागू अपवाद अपनी जगह रहते हैं। लेकिन यदि अपंजीकृत सप्लायर सीमा से नीचे है, तब भी अधिसूचित माल खरीदने वाले पंजीकृत कारोबारी पर रिवर्स चार्ज की जिम्मेदारी बन सकती है। खरीदार को दस्तावेज, सप्लायर का विवरण और कर भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखना चाहिए।
ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए अलग सुविधा
GST बदलावों के एक अन्य हिस्से में ई-कॉमर्स मंच के जरिए दूसरे राज्य में कारोबार शुरू करने वाले कुछ छोटे विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल की गई है। तय शर्तों के अधीन, पहले से पंजीकृत व्यक्ति अपने उसी PAN के आधार पर दूसरे राज्य में अलग GST पंजीकरण ले सकता है और मंच के सहमत गोदाम को व्यावसायिक स्थान घोषित कर सकता है। यह सुविधा हर ऑनलाइन विक्रेता के लिए स्वतः उपलब्ध नहीं है; मंच की सहमति, गोदाम के दस्तावेज और नियमों की अन्य पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।
कारोबार अभी क्या तैयारी करे
खरीदार अपने ERP या बिलिंग सिस्टम में अधिसूचित वस्तुओं के सही HSN और RCM संकेत जोड़ें। अकाउंट टीम को अलग से जाँचना चाहिए कि सप्लायर पंजीकृत है या नहीं, किस पक्ष को कर जमा करना है और TDS की कटौती लागू होती है या नहीं। पुराने लेन-देन और लंबित रिफंड पर नए नियमों को पिछली तारीख से लागू मानने के बजाय संबंधित अधिसूचना की प्रभावी तारीख देखें। छोटे विक्रेता अपने राज्य, कारोबार की कुल सीमा और ई-कॉमर्स मंच की शर्तों की पुष्टि कर लें।
इन बदलावों का व्यावहारिक असर दस्तावेजी अनुशासन पर निर्भर करेगा। अधिसूचित माल खरीदने वाले कारोबारों के लिए हर चालान पर वस्तु-वर्ग, GSTIN और भुगतान का मिलान करना अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण है।


