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निधि कंपनियों में जमा पर बीमा नहीं: ऊँचे रिटर्न के वादों को लेकर MCA की एडवाइजरी

बचत के सिक्कों और दस्तावेज की जाँच का सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने निधि कंपनियों में पैसा जमा करने से पहले उनकी मान्यता और शर्तों की स्वतंत्र जाँच करने को कहा है। 24 सितंबर की एडवाइजरी में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन कंपनियों में जमा रकम को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी DICGC का बीमा संरक्षण नहीं मिलता।

मंत्रालय के अनुसार, कुछ कंपनियाँ असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा कर लोगों को आकर्षित करती हैं। ऐसे में केवल एजेंट की बात या अनौपचारिक आश्वासन पर वित्तीय निर्णय लेने से बचने की सलाह दी गई है।

कंपनी की मान्यता की जाँच पर जोर

एडवाइजरी में कहा गया है कि निधि के रूप में काम करने की इच्छुक प्रत्येक कंपनी के लिए स्वयं को निधि घोषित या अपडेट कराने हेतु NDH-4 फॉर्म में आवेदन करना अनिवार्य है। मंत्रालय को आवेदनों की जाँच के दौरान कई कंपनियों में लागू प्रावधानों का पूरा पालन नहीं होने और निर्धारित समय में आवेदन नहीं दिए जाने के मामले मिले हैं।

मंत्रालय ने 24 सितंबर के विवरण में केंद्र सरकार द्वारा निधि घोषित 395 कंपनियों का उल्लेख किया है। उसने सार्वजनिक जानकारी के लिए अपने पोर्टल पर 3 नवंबर 2025 को प्रकाशित सक्रिय निधि कंपनियों की सूची का संदर्भ भी दिया है। मंत्रालय द्वारा बताई गई आधिकारिक सूची देखी जा सकती है।

सदस्यों तक सीमित जमा और ऋण

निधि कंपनियाँ पारस्परिक लाभ वाली कंपनियाँ हैं। कंपनी अधिनियम, 2013 और निधि नियम, 2014 के तहत उनका नियमन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय करता है। वे केवल अपने सदस्यों से जमा स्वीकार कर सकती हैं और सदस्यों को ही ऋण दे सकती हैं।

मंत्रालय ने कहा कि पैसा रखने से पहले यह जाँचना चाहिए कि कंपनी को केंद्र सरकार ने निधि के रूप में घोषित किया है या नहीं। जमा की अवधि और उससे जुड़ी शर्तों को भी ध्यान से समझने की सलाह दी गई है।

एडवाइजरी के अनुसार, कंपनी के विफल होने या धोखाधड़ी की स्थिति में जमा रकम की वापसी कठिन या अधूरी हो सकती है। इसलिए निधि कंपनी की जमा राशि को बीमाकृत बैंक जमा जैसा संरक्षण प्राप्त मानना सही नहीं है।