पूरा भारत · हिन्दी
▤   पूरा भारतदेश की आवाज़पूरी तस्वीरराष्ट्रीय संस्करण
⌖ पूरा भारत

दूध से न बने उत्पादों को ‘पनीर’ कहने पर रोक का प्रस्ताव, FSSAI ने सुझाव माँगे

पनीर के टुकड़ों और दूध की बोतल का सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बने उत्पादों के नाम, लेबल और प्रचार में ‘पनीर’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने इसके लिए मसौदा संशोधन जारी किया है। यह अभी अंतिम रूप से लागू नया प्रतिबंध नहीं है; मसौदे पर जनता और हितधारकों से आपत्तियाँ तथा सुझाव माँगे गए हैं।

नाम से साफ हो उत्पाद की प्रकृति

24 सितंबर को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे एनालॉग उत्पादों को पनीर के रूप में पेश किए जाने से रोकना है, जो दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बने हैं। प्राधिकरण चाहता है कि नाम और प्रस्तुति से खाद्य पदार्थ की वास्तविक प्रकृति तथा संरचना का सही पता चले और खरीदार भ्रमित न हों।

प्रस्तावित बदलाव खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 के विनियम 2.1.1 में नया खंड जोड़ने से संबंधित है। मसौदे में डेयरी संदर्भ में एनालॉग श्रेणी के तहत पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत उत्पादों के नामकरण, लेबलिंग और विपणन में भी ‘पनीर’ शब्द का प्रयोग बंद करने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

सुझाव देने की अवधि कैसे गिनी जाएगी

अधिसूचना वाले राजपत्र की प्रतियाँ जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिन की अवधि पूरी होने के बाद मसौदे पर विचार किया जाएगा। इसलिए इस अवधि को केवल समाचार जारी होने की तारीख से जोड़कर अंतिम तिथि मानना ठीक नहीं होगा।

आपत्तियाँ और सुझाव FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एफडीए भवन, कोटला रोड, नई दिल्ली–110002 को भेजे जा सकते हैं। अधिसूचना में निर्दिष्ट ईमेल पते से भी सुझाव देने का विकल्प बताया गया है।

फिलहाल उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए प्रमुख बात मसौदे और अंतिम नियम में अंतर समझना है। प्रस्ताव उत्पाद के नाम तथा उसे प्रस्तुत करने के तरीके से जुड़ा है। घोषणा में किसी खास ब्रांड को दोषी नहीं बताया गया है।