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नावा सोलर परियोजना: जाम्बिया में 100 मेगावाट संयंत्र चालू, 20 साल तक बिजली बेचेगी कंपनी

नावा सोलर परियोजना के विषय में सौर संयंत्र और ग्रिड का सांकेतिक चित्र

नावा लिमिटेड की जाम्बिया स्थित सौर परियोजना से बिजली ग्रिड में भेजनी शुरू हो गई है। कंपनी ने 24 सितंबर 2026 को बताया कि उसकी अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी माम्बा सोलर एनर्जी लिमिटेड का 100 मेगावाट सौर संयंत्र चालू हो गया है। इससे समूह के ऊर्जा कारोबार में बड़े पैमाने पर सौर बिजली उत्पादन का नया हिस्सा जुड़ा है।

परियोजना की पूरी उत्पादित बिजली के लिए खरीदार पहले से तय है। माम्बा सोलर एनर्जी ने जाम्बिया की राष्ट्रीय बिजली कंपनी ZESCO लिमिटेड के साथ 20 साल का बिजली खरीद समझौता किया है। हालांकि, घोषणा में बिक्री दर, परियोजना की कुल लागत या अनुमानित सालाना कमाई नहीं बताई गई है।

नावा सोलर परियोजना में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

संयंत्र का संचालन करने वाली माम्बा सोलर एनर्जी लिमिटेड, यानी MSEL, जाम्बिया की कंपनी है। इसमें नावा की अंतरराष्ट्रीय इकाई नावा ग्लोबल की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष 35 प्रतिशत हिस्सेदारी जाम्बिया की निवेश होल्डिंग कंपनी ZCCM Investments Holdings PLC के पास है। इस संरचना में MSEL सीधे नावा लिमिटेड के बजाय उसकी अंतरराष्ट्रीय इकाई के जरिए समूह से जुड़ी है।

बिंदु पुष्ट जानकारी
परियोजना का देश जाम्बिया
सौर संयंत्र की क्षमता 100 मेगावाट
संचालक कंपनी माम्बा सोलर एनर्जी लिमिटेड
बिजली खरीदार ZESCO लिमिटेड
समझौते की अवधि 20 साल
वर्तमान स्थिति संयंत्र चालू, ग्रिड को बिजली भेजना शुरू

ग्रिड से जुड़ने और बिजली खरीद समझौते का मतलब

किसी बिजली परियोजना में संयंत्र तैयार होने के साथ उत्पादित बिजली को बाहरी नेटवर्क तक पहुँचाना भी जरूरी होता है। नावा ने दोनों पहलुओं की जानकारी दी है: संयंत्र की कमीशनिंग हो चुकी है और उससे जाम्बिया के ग्रिड तक बिजली की निकासी शुरू है। इसलिए यह घोषणा केवल भविष्य की निर्माण योजना तक सीमित नहीं है।

लंबी अवधि का बिजली खरीद समझौता उत्पादन बेचने की व्यावसायिक व्यवस्था तय करता है। यहाँ समझौता संयंत्र की पूरी उत्पादित बिजली को शामिल करता है। फिर भी सिर्फ 100 मेगावाट क्षमता और 20 साल की अवधि के आधार पर सालाना राजस्व या मुनाफा तय नहीं किया जा सकता। उसके लिए उत्पादन, बिक्री दर, खर्च और भुगतान जैसी जानकारी जरूरी होगी। कंपनी ने इस घोषणा में इनका वित्तीय अनुमान नहीं दिया है।

समूह के कारोबार में क्या बदलाव आया?

नावा के व्यवसायों में बिजली उत्पादन, खनन और फेरो अलॉय शामिल हैं। अब जाम्बिया की यह परियोजना उसके नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार के विस्तार में परिचालन स्तर का कदम है। कंपनी ने इसे बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा में प्रवेश और अपने कारोबारी पोर्टफोलियो को विविध बनाने की रणनीति से जोड़ा है।

प्रबंधन का कहना है कि इस आधार पर अलग-अलग देशों में आगे की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के अवसर देखे जा सकेंगे। फिलहाल घोषित और चालू क्षमता इसी 100 मेगावाट परियोजना की है; भविष्य के विस्तार को मौजूदा परिचालन क्षमता में नहीं जोड़ा गया है। आगे इस कारोबार का वित्तीय असर समझने के लिए कंपनी के उत्पादन और आय संबंधी आगामी खुलासे अहम होंगे।