भारत और प्रशांत द्वीप देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई और आपदाओं का सामना करने की क्षमता बढ़ाने के लिए सहयोग आगे बढ़ाने पर चर्चा की है। न्यूयॉर्क में 23 सितंबर को हुई भारत–प्रशांत द्वीप सहयोग मंच (FIPIC) की विदेश मंत्रिस्तरीय बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और क्षमता निर्माण को भी प्राथमिकताओं में रखा गया।
विदेश मंत्रालय ने 24 सितंबर को बैठक का विवरण जारी किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। FIPIC के तहत विदेश मंत्रियों के स्तर पर यह दूसरी बैठक थी।
2023 की कार्ययोजना की प्रगति पर चर्चा
विचार-विमर्श में पहले हुए FIPIC शिखर सम्मेलनों के परिणामों की समीक्षा की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 2023 में घोषित 12 सूत्रीय कार्ययोजना के अंतर्गत सहयोग भी शामिल था। प्रतिभागियों ने भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच हुए काम की प्रगति का स्वागत किया।
आधिकारिक विवरण में आगे के सहयोग के क्षेत्र बताए गए हैं, लेकिन किसी नए वित्तीय पैकेज, परियोजना की लागत या काम पूरा करने की नई समयसीमा की घोषणा नहीं की गई है। बैठक का केंद्र मौजूदा साझेदारी की समीक्षा और आगे मिलकर काम करने की प्राथमिकताएँ रहीं।
किन देशों ने भाग लिया
फिजी, मार्शल द्वीप गणराज्य, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप और तुवालू के विदेश मंत्री बैठक में शामिल हुए। समोआ का प्रतिनिधित्व उसके उपप्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री ने किया, जबकि टोंगा के वित्त मंत्री और वानुआतु के स्वास्थ्य मंत्री ने भी भाग लिया।
माइक्रोनेशिया संघीय राज्य के न्याय विभाग के सचिव एवं अटॉर्नी जनरल, नाउरू के उप विदेश मंत्री और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के महासचिव भी मौजूद थे। इस तरह चर्चा में विदेश नीति के साथ वित्त, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी क्षेत्रों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व रहा।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ काम करने की प्रतिबद्धता
बैठक में FIPIC साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। भागीदारों ने क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग जारी रखने पर जोर दिया। ऊर्जा और जलवायु के साथ शिक्षा तथा स्वास्थ्य को चर्चा में स्थान मिलने से आगे के संवाद के प्रमुख क्षेत्र स्पष्ट हुए हैं।



