अडानी पावर की दस पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों को मूल कंपनी में मिलाने की योजना को दोनों संबंधित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) बेंचों की मंजूरी मिल गई है। मुंबई बेंच ने 24 सितंबर 2026 के आदेश में विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड के विलय को स्वीकृति दी है। बाकी नौ कंपनियों के लिए अहमदाबाद बेंच पहले ही 4 अगस्त को आदेश दे चुकी थी।
कंपनी ने 25 सितंबर को शेयर बाजारों को इस घटनाक्रम की जानकारी दी। हालांकि, मंजूरी मिलने और विलय के प्रभावी होने में अंतर है। अडानी पावर ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत योजना के तहत बाकी चरण पूरे होने के बाद ही यह लागू होगी। प्रभावी होने की सूचना अलग से दी जाएगी।
अडानी पावर विलय में कौन-सी कंपनियाँ शामिल हैं?
योजना में अडानी पावर दहेज, कच्छ पावर जनरेशन, रिसर्जेंट फ्यूल मैनेजमेंट, महान फ्यूल मैनेजमेंट, ओरिसा थर्मल एनर्जी, कोरबा पावर, अनूपपुर थर्मल एनर्जी (एमपी), मिर्जापुर थर्मल एनर्जी (यूपी), एम्बरिजा इंफ्रा पार्क और विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर शामिल हैं। कच्छ पावर जनरेशन के सभी इक्विटी शेयर अडानी पावर दहेज के पास हैं, इसलिए वह परोक्ष रूप से पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई है।
विदर्भ इंडस्ट्रीज का पंजीकृत कार्यालय महाराष्ट्र में है। उसके मामले की सुनवाई मुंबई में हुई, जबकि अन्य नौ इकाइयों और मूल कंपनी के लिए अहमदाबाद बेंच में प्रक्रिया चली। मुंबई का आदेश 25 सितंबर को न्यायाधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड हुआ और कंपनी ने उसकी प्रति अपनी सूचना के साथ संलग्न की है।
नई शेयर हिस्सेदारी मिलेगी या केवल ढाँचा बदलेगा?
यह पहले से समूह के पूर्ण स्वामित्व में मौजूद कंपनियों का एकीकरण है। स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार संबंधित सहायक कंपनियों के शेयर रद्द होंगे और उनके बदले अडानी पावर के नए इक्विटी शेयर आवंटित नहीं किए जाएंगे। इसलिए इस खबर को शेयरधारकों के लिए बोनस शेयर या किसी नए शेयर आवंटन की घोषणा की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
कंपनी प्रबंधन ने योजना के उद्देश्य में कारोबारी संचालन को एकीकृत करना, संसाधनों का बेहतर उपयोग और अलग-अलग कानूनी इकाइयों से जुड़ी अनुपालन प्रक्रियाएँ घटाना बताया है। बेहतर वित्तीय लचीलापन और लागत नियंत्रण भी अपेक्षित लाभों में शामिल हैं। ये योजना के उद्देश्य हैं; आदेश से किसी निश्चित बचत, मुनाफे या शेयर भाव बढ़ने की गारंटी नहीं निकलती।
1 अप्रैल 2025 की तारीख का क्या अर्थ है?
योजना की निर्धारित आधार तिथि, जिसे “अपॉइंटेड डेट” कहा गया है, 1 अप्रैल 2025 है। इसे आज विलय पूरी तरह लागू हो जाने की तारीख नहीं माना जा सकता। कंपनी ने प्रभावी होने को मंजूर योजना में तय शेष कदम पूरे होने से जोड़ा है।
मुंबई के आदेश में प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर उसे संबंधित कंपनी रजिस्ट्रार के पास दाखिल करने का निर्देश भी है। मंजूरी से कर, स्टांप ड्यूटी या दूसरी कानूनी जिम्मेदारियों से स्वतः छूट नहीं मिलती। संबंधित देनदारियों और कार्यवाहियों का हस्तांतरण भी योजना और आदेश के अनुसार होगा।
विदर्भ इकाई के कर्मचारियों के लिए आदेश में प्रभावी तिथि पर बिना सेवा में रुकावट और पहले से कम अनुकूल न होने वाली शर्तों पर मूल कंपनी में स्थानांतरण का प्रावधान है। अब अगला निर्णायक घटनाक्रम अडानी पावर की ओर से योजना प्रभावी होने की औपचारिक सूचना होगी।



