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पति के कर्ज के लिए पत्नी की FD काटना गलत: SBI को ₹19.90 लाख लौटाने का हाईकोर्ट आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक को एक विधवा की सावधि जमा (FD) से काटे गए ₹19,90,693 वापस करने का आदेश दिया है। बैंक को यह रकम महिला को उसकी लागू एफडी ब्याज दर के साथ चार सप्ताह में लौटानी होगी। अदालत ने एक लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।

मामले में महिला के पति ने नवंबर 2020 में एसबीआई से ₹15 लाख का व्यक्तिगत ऋण लिया था और मई 2021 में उनका निधन हो गया। अदालत ने पाया कि पत्नी उस ऋण में सह-आवेदक, सह-उधारकर्ता, गारंटर, जमानतदार या क्षतिपूर्तिकर्ता नहीं थीं। बैंक ऐसा कोई कानूनी आधार भी नहीं दिखा सका जिससे पति का बकाया सीधे पत्नी के खाते से काटा जा सके।

रिकॉर्ड के अनुसार बैंक ने सितंबर 2025 में महिला से ₹13.87 लाख बकाया और ब्याज माँगा तथा उनका वेतन खाता रोक दिया था। आरबीआई लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद रोक हटी। बाद में महिला की एफडी एक शाखा से उस शाखा में स्थानांतरित की गई जहाँ पति का ऋण खाता था, रकम काटी गई और खाता वापस पुरानी शाखा में भेज दिया गया।

पीठ ने कहा कि बैंक को कानूनी उत्तराधिकारी के विरुद्ध कोई वैध दावा हो तो उसकी वसूली कानून में तय प्रक्रिया से ही की जा सकती है। यह फैसला हर संयुक्त ऋण या गिरवी रखी एफडी पर अपने आप लागू नहीं माना जा सकता; सह-उधारकर्ता, गारंटर या वैध lien वाले मामलों की स्थिति अलग हो सकती है। प्रभावित ग्राहक अपने दस्तावेज, ऋण अनुबंध और एफडी पर दर्ज lien की शर्तें जाँचें।