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फरक्का जल संधि पर जदयू की मांग: बिहार के हित सुरक्षित किए बिना न हो नवीनीकरण

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने केंद्र से कहा है कि बांग्लादेश के साथ 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि का बिहार के हितों की सुरक्षा किए बिना नवीनीकरण नहीं किया जाए। यह संधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है।

बाढ़ और गाद का मुद्दा उठाया

संजय झा ने 10 सितंबर को पटना में पार्टी के ‘नीतीश संवाद यात्रा’ कार्यक्रम के पहले चरण के समापन पर मीडिया से बातचीत में फरक्का बैराज के बिहार वाले हिस्से में गाद जमा होने को राज्य की बार-बार आने वाली बाढ़ से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि तीन दशक में बिहार को पानी का उचित हिस्सा नहीं मिला और बढ़ती आबादी व भविष्य की जरूरतों को नई व्यवस्था में शामिल किया जाना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी नदियों में गाद को बाढ़ की स्थिति गंभीर होने का कारण बताया और कहा कि राज्य ने यह विषय केंद्र के सामने रखा है। ये राजनीतिक नेताओं के दावे हैं; जल प्रवाह, गाद और बाढ़ के बीच संबंध पर अंतिम नीति निर्णय केंद्र और संबंधित तकनीकी आकलन के आधार पर होगा।

केंद्र पहले दे चुका है विचार का भरोसा

संजय झा ने अगस्त में राज्यसभा में भी यह मामला उठाते हुए कहा था कि बिहार को 2050 तक करीब 2,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कृषि, पेयजल, उद्योग और भूजल सुरक्षा को संधि की समीक्षा में शामिल करने की मांग की थी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सितंबर की शुरुआत में पत्र के जरिए भरोसा दिया था कि केंद्र संधि पर निर्णय लेते समय बिहार की पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखेगा। पश्चिम बंगाल सरकार भी केंद्र से राज्य के हितों की रक्षा की मांग कर चुकी है।

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के जल बंटवारे की नई व्यवस्था दोनों देशों के संबंधों के साथ बिहार और पश्चिम बंगाल की जल सुरक्षा पर भी असर डालेगी। अब ध्यान केंद्र की बातचीत और वैज्ञानिक जल-आवश्यकता आकलन पर रहेगा।