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बिहार के 1.17 लाख किसानों को खरीफ 2024 की फसल सहायता, खाते में रकम जांचने का तरीका

फसल सहायता भुगतान की जानकारी देखते बिहार के किसान परिवार का सांकेतिक दृश्य

पटना, 12 सितंबर 2026। बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत खरीफ 2024 में फसल नुकसान झेलने वाले 1,17,708 किसानों को भुगतान की सूचना राज्य के सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने दी है। शुक्रवार को जारी राशि लगभग 104.46 करोड़ रुपये बताई गई। भुगतान का संबंध दो साल पुराने खरीफ मौसम के सत्यापित आवेदनों से है; इसे मौजूदा खरीफ 2026 के सभी किसानों को नया भुगतान समझना गलत होगा।

किस लाभार्थी को रकम मिली

मंत्री के अनुसार खरीफ 2024 के लिए प्राप्त आवेदनों का सत्यापन पूरा होने के बाद करीब 714 पंचायतों के पात्र किसानों को सीधे बैंक खातों में राशि भेजी गई। धान और मक्का के लिए पंचायत स्तर तथा सोयाबीन, आलू और कुछ सब्जियों के लिए जिला स्तर पर फसल आकलन की व्यवस्था बताई गई थी। कुल भुगतान लगभग 104.46 करोड़ रुपये बताया गया है। किसी व्यक्ति को मिलने वाली रकम उसकी पात्रता और स्वीकृत नुकसान पर निर्भर करेगी।

भुगतान में लंबा समय लगने का सवाल भी उठा है। किसान प्रतिनिधियों ने देरी की आलोचना की है। सहकारिता विभाग का कहना है कि आवेदन और उपज संबंधी सत्यापन के बाद लाभार्थियों को राशि दी गई। यदि किसान को अपेक्षित भुगतान नहीं मिला है, तो बैंक खाते और आवेदन की स्थिति का आधिकारिक रिकॉर्ड देखकर ही आगे शिकायत करें।

खरीफ 2026 के आवेदन अलग हैं

बिहार सहकारिता विभाग के ई-सहकारी पोर्टल पर खरीफ 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन खुले दिख रहे हैं। यह पिछले मौसम के भुगतान से अलग प्रक्रिया है। विभाग ने फसल सहायता की भुगतान स्थिति जांचने की सेवा भी दी है। आवेदन, पंजीकरण और भुगतान के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें; किसी अनजान संदेश में बैंक विवरण या ओटीपी साझा न करें।

सहायता की गणना कैसे होती है

योजना के बताए नियमों के अनुसार वास्तविक उपज में 20 प्रतिशत तक कमी होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, अधिकतम दो हेक्टेयर तक 15,000 रुपये की सहायता दी जाती है। 20 प्रतिशत से अधिक कमी पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, अधिकतम दो हेक्टेयर तक 20,000 रुपये का प्रावधान बताया गया है। ये अधिकतम सीमाएं हैं, हर आवेदक को समान राशि का वादा नहीं। पात्रता, अधिसूचित फसल और वर्तमान मौसम के नियम अलग से जांचें। कृषि यंत्र अनुदान अलग योजना है, उसके आवेदन को फसल सहायता का दावा न मानें।