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कम नमी वाले खेत में मोठ की चार किस्मों का परीक्षण, बीज विस्तार की तैयारी

राजस्थान में शुष्क खेत पर उगती मोठ की फसल का सांकेतिक दृश्य

काजरी मोठ किस्में, 13 सितंबर 2026। पश्चिमी राजस्थान में खरीफ की खेती अक्सर बारिश के लंबे विराम पर निर्भर करती है। जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान के परीक्षण में काजरी मोठ-4, 5, 6 और 7 के पौधों ने लगभग 35 दिन के सूखे दौर में हरियाली और फलियों का विकास बनाए रखा। यह एक खेत का प्रदर्शन है; इससे हर जमीन पर समान उपज या निश्चित आमदनी का दावा नहीं बनता।

परीक्षण में नमी कैसे बदली?

संस्थान के विवरण के मुताबिक 3 अगस्त की अच्छी बारिश के बाद 7 सितंबर तक पर्याप्त बरसात नहीं हुई। शुरुआती दौर में मिट्टी की ऊपरी 0–10 सेंटीमीटर परत में नमी लगभग 15–16 प्रतिशत थी, जो बाद में 5–6 प्रतिशत तक घट गई। 10–40 सेंटीमीटर की गहरी परत में नमी करीब 23 से 16 प्रतिशत हुई। निचली परत में बचा पानी, पौधों का फैलाव और जमीन ढकने की क्षमता फसल को सहारा देने वाले कारक बताए गए हैं।

10 जुलाई से 2 सितंबर के बीच करीब 317 मिलीमीटर कुल वाष्पीकरण दर्ज हुआ। इनमें सूखे दौर में लगभग 180 मिलीमीटर पानी वाष्पीकरण से निकला। परीक्षण वाली मिट्टी में जैविक कार्बन केवल 0.13–0.18 प्रतिशत था और पीएच 7.9–8.1 के बीच था। ऐसे हालात में बुआई के करीब 55 दिन बाद भी पौधों में फलियाँ दिखाई देना ध्यान देने योग्य परिणाम है, लेकिन अंतिम दाना उपज का तुलनात्मक आँकड़ा इस रिपोर्ट में नहीं दिया गया।

केवल किस्म नहीं, खेत प्रबंधन भी अहम

काजरी के अनुसार समय पर बुआई, कतारों के बीच 45 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर दूरी रखी गई। बुआई के लगभग 20 दिन बाद यांत्रिक गुड़ाई के साथ निराई की गई, ताकि खरपतवार से पानी की प्रतिस्पर्धा कम हो और उपलब्ध नमी का उपयोग फसल कर सके। किस्मों में लगभग 30 दिन के आसपास फलियाँ बननी शुरू होने की क्षमता बताई गई है। इसलिए परीक्षण को अकेले बीज की विशेषता का परिणाम मानना सही नहीं होगा।

मोठ पश्चिमी राजस्थान की महत्वपूर्ण वर्षा-आधारित दलहन फसल है। वहाँ लगभग दस लाख हेक्टेयर में इसकी खेती और औसत उत्पादकता करीब 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बताई गई है। संस्थान की सूची में मोठ-4 से 7 सहित अन्य विकसित किस्में भी दर्ज हैं। खेत, मौसम और बीज की उपलब्धता के हिसाब से स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही किस्म चुनें।

बीज किसानों तक कब पहुँचेगा?

काजरी ने 2026 में साथी पोर्टल पर इन किस्मों के लिए 23.32 क्विंटल बीज की मांग और अपने अनुसंधान फार्म के सात हेक्टेयर में बीज उत्पादन की तैयारी बताई है। 2025 में दर्ज मांग 63.2 क्विंटल थी। मांग का आँकड़ा उपलब्ध या वितरित बीज की मात्रा नहीं है। आगे उत्पादन, गुणवत्ता जाँच और वितरण से वास्तविक उपलब्धता स्पष्ट होगी। संस्थान के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने किस्मों के साथ समय पर बुआई, उचित पौध संख्या और नमी संरक्षण पर जोर दिया है। राज्यवार मौसम पूर्वानुमान में राजस्थान की बारिश की संभावना भी देखें।