बुकावु स्कूल आग ने पूर्वी कांगो के दक्षिण किवु प्रांत में एक घनी आबादी वाले इलाके को भारी नुकसान पहुंचाया है। गुरुवार, 10 सितंबर 2026 की सुबह एक मकान से शुरू हुई आग देखते ही देखते आसपास के दो स्कूलों और सैकड़ों लकड़ी के घरों तक फैल गई। अलग-अलग स्थानीय प्रशासनों ने मृत बच्चों की संख्या 24 और 26 बताई है। दोनों आंकड़े अभी प्रारंभिक हैं और अधिकारियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।
दो आधिकारिक बयानों में अलग-अलग मृतक संख्या
दक्षिण किवु की प्रांतीय सरकार ने अपने बयान में कम से कम 26 विद्यार्थियों की मौत की जानकारी दी। इस संख्या में 19 लड़कियां और सात लड़के शामिल बताए गए। दूसरी ओर, शहर पर नियंत्रण रखने वाले AFC/M23 प्रशासन ने 24 विद्यार्थियों की मौत बताई, जिनमें 19 लड़कियां और पांच लड़के शामिल हैं। उसी प्रशासन ने कहा कि 29 घायलों का स्थानीय चिकित्सा केंद्रों में इलाज चल रहा है।
इन दोनों बयानों में दो बच्चों का अंतर है, इसलिए किसी एक संख्या को अंतिम मानना अभी उचित नहीं होगा। राहत दल, अस्पताल और स्थानीय अधिकारी पीड़ितों की सूची मिलाकर अंतिम आंकड़ा तैयार कर रहे हैं। बड़ी संख्या में घायल अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाए गए, जिससे शुरुआती घंटों में सटीक गिनती करना कठिन रहा।
बुकावु स्कूल आग: मकान से स्कूलों तक कैसे पहुंचीं लपटें
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक आग बुकावु के चिमपुंडा इलाके की फुनु बी सड़क पर स्थित एक मकान में शुरू हुई। सुबह करीब आठ बजे विद्यार्थी स्कूल पहुंच चुके थे। पास-पास बनी लकड़ी की इमारतों के कारण लपटें तेजी से फैलीं और फुराहा तथा उजामा स्कूलों को अपनी चपेट में ले लिया। लगभग 300 लकड़ी के मकान भी जलने की जानकारी दी गई है। कुछ स्थानीय आकलनों में प्रभावित मकानों की संख्या इससे अधिक बताई गई, लेकिन नुकसान का अंतिम सर्वे अभी पूरा नहीं हुआ है।
अग्निशमन और स्थानीय लोगों की कोशिशों के बाद दोपहर तक आग पर काबू पा लिया गया। इसके बाद भी मलबे और मुड़ी हुई टीन की चादरों के बीच से सफेद धुआं उठता दिखाई दिया। घनी बस्ती, संकरे रास्ते और लकड़ी से बने घरों ने राहत कार्य को मुश्किल बनाया।
संकरे निकास पर भगदड़, कुछ बच्चे खिड़कियों से कूदे
बुकावु स्कूल आग के दौरान फुराहा स्कूल के भीतर कई विद्यार्थी लपटों और धुएं के बीच फंस गए। स्थानीय अधिकारी मोइज लुबाला के अनुसार बाहर निकलने का रास्ता बहुत संकरा था। घबराए कुछ बच्चे खिड़कियों से कूदने लगे, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी एक साथ दरवाजे की ओर बढ़े। इसी दौरान धक्का-मुक्की और भगदड़ हुई, जिसमें कुछ बच्चे गिर गए और उनके ऊपर दूसरे लोग चढ़ते चले गए।
अस्पताल पहुंचाए गए बच्चों में जलने, धुएं से दम घुटने और भगदड़ में चोट लगने के मामले शामिल हैं। न्यामुलागिरा BDOM स्वास्थ्य केंद्र सहित कई चिकित्सा संस्थानों में विद्यार्थियों का उपचार किया गया। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि घायलों की संख्या अधिक होने के कारण नाम और स्थिति दर्ज करने में समय लग रहा था।
आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं
प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन आग किस वजह से लगी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जिस इलाके से आग शुरू हुई वह बेहद घना है और अधिकांश घर लकड़ी तथा टीन से बने हैं। ऐसे क्षेत्रों में छोटी चिंगारी भी बहुत तेजी से कई इमारतों तक पहुंच सकती है। अधिकारी घटनास्थल की जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और बिजली या घरेलू ईंधन से जुड़े संभावित कारणों की पड़ताल कर रहे हैं।
फिलहाल किसी व्यक्ति या समूह को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपुष्ट दावों से बचने और राहत कार्य में सहयोग करने की अपील की है। स्कूलों में आपात निकास की चौड़ाई, अग्निशमन साधनों की उपलब्धता और घनी बस्तियों में बचाव मार्ग की स्थिति भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
संघर्षग्रस्त पूर्वी कांगो में राहत की चुनौती
बुकावु पर फरवरी 2025 से M23 समूह का नियंत्रण है। कांगो की केंद्रीय सरकार का पूर्वी हिस्से पर सीमित नियंत्रण और लंबे समय से जारी संघर्ष राहत तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले ही दबाव डालते रहे हैं। ऐसे में बड़े अग्निकांड के बाद अस्पतालों, एंबुलेंस और स्थानीय बचाव दल पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
बुकावु स्कूल आग के बाद सबसे जरूरी काम मृतकों और घायलों की अंतिम सूची तैयार करना, परिवारों को जानकारी देना और प्रभावित विद्यार्थियों के उपचार की व्यवस्था करना है। 24 और 26 के अलग-अलग प्रारंभिक आंकड़ों के बीच अंतिम पुष्टि का इंतजार है। जांच पूरी होने पर आग का कारण और स्कूलों तक लपटें पहुंचने की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हो सकेगी।


