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ECB ने 3 ब्याज दरें बढ़ाईं, 16 सितंबर से लागू होंगे नए रेट

यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) ने महंगाई के दबाव के बीच अपनी तीन प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का फैसला किया है। बर्लिन में 10 सितंबर 2026 को हुई बैठक में लिया गया यह निर्णय 16 सितंबर से प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि घोषित नई दरों को आज से लागू दर […]

ECB की ब्याज दर बढ़ोतरी का सांकेतिक AI चित्र: यूरो चिह्न, बैंक भवन और यूरो नोट

यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) ने महंगाई के दबाव के बीच अपनी तीन प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का फैसला किया है। बर्लिन में 10 सितंबर 2026 को हुई बैठक में लिया गया यह निर्णय 16 सितंबर से प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि घोषित नई दरों को आज से लागू दर मानना सही नहीं होगा। बैंक ने ऊर्जा की महंगाई और मध्य पूर्व के संघर्ष से पैदा अनिश्चितता को अपनी नीति के लिए अहम चुनौती बताया है।

ECB की तीनों नई दरें कितनी होंगी?

डिपॉजिट फैसिलिटी की दर 2.25 प्रतिशत से बढ़कर 2.50 प्रतिशत होगी। मुख्य पुनर्वित्त परिचालन की दर 2.40 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.65 प्रतिशत और सीमांत ऋण सुविधा की दर 2.65 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.90 प्रतिशत की गई है। तीनों बदलाव 16 सितंबर 2026 से लागू होंगे। 25 आधार अंक का अर्थ 0.25 प्रतिशत अंक है; इसे ब्याज दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि नहीं समझना चाहिए।

ये केंद्रीय बैंक की नीति दरें हैं। किसी परिवार या कंपनी के मौजूदा कर्ज पर कितना असर पड़ेगा, यह उसके ऋण की शर्तों, तय या परिवर्तनीय ब्याज दर और संबंधित बैंक के फैसले पर निर्भर करेगा। इसलिए सभी ग्राहकों की किस्त में एक साथ समान बढ़ोतरी होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

महंगाई के मोर्चे पर क्यों बढ़ी सख्ती?

यूरो क्षेत्र में अगस्त की महंगाई 3.3 प्रतिशत रही, जबकि केंद्रीय बैंक का मध्यम अवधि का लक्ष्य 2 प्रतिशत है। तेल और दूसरी ऊर्जा लागत बढ़ने से परिवहन, उत्पादन और कारोबार के खर्च पर दबाव पड़ता है। कंपनियां बढ़ी लागत ग्राहकों तक पहुंचाती हैं तो असर ऊर्जा से आगे दूसरे सामान और सेवाओं में भी फैल सकता है।

ऊंची नीति दरें बैंकों के लिए धन की लागत बढ़ा सकती हैं। इससे उधारी, खर्च और निवेश की मांग कुछ धीमी पड़ने की संभावना रहती है। यही वह रास्ता है जिसके जरिए ब्याज दर का फैसला कीमतों के दबाव को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि इससे तेल की आपूर्ति की समस्या सीधे हल नहीं होती।

अनुमान क्या कहते हैं?

ECB के नए आधार परिदृश्य में औसत महंगाई 2026 में 3.0 प्रतिशत, 2027 में 2.5 प्रतिशत और 2028 में 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं को छोड़कर महंगाई का अनुमान इन तीन वर्षों के लिए क्रमशः 2.5 प्रतिशत, 2.6 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत है। ये आगे के आकलन हैं, दर्ज हो चुके परिणाम नहीं।

आर्थिक वृद्धि का अनुमान 2026 के लिए 0.9 प्रतिशत, 2027 के लिए 1.4 प्रतिशत और 2028 के लिए 1.5 प्रतिशत रखा गया है। ECB ने 2026 और 2027 का वृद्धि अनुमान सुधारा है। उसके मुताबिक यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था ने पहले के आकलन से अधिक मजबूती दिखाई है, लेकिन महंगाई बढ़ने और विकास कमजोर पड़ने के जोखिम बने हुए हैं।

कारोबार और रोजगार की तस्वीर

ECB की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने अपने वक्तव्य में बताया कि ऊर्जा के झटके के बावजूद दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई। रक्षा और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च से विनिर्माण को सहारा मिला है। उपभोक्ता भरोसे में सुधार ने सेवाओं की गतिविधि को भी मदद दी है।

डिजिटल सेवाओं, कारोबारी निवेश और निर्यात में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी गतिविधियां बढ़ती दिख रही हैं। जुलाई में बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत पर स्थिर रही। बैंक ने यह भी कहा कि रोजगार और श्रमबल की वृद्धि धीमी हो रही है, जबकि उत्पादकता में धीरे-धीरे सुधार आया है।

आगे ब्याज दरों का रास्ता तय नहीं

ECB ने भविष्य में दरों के किसी निश्चित क्रम का वादा नहीं किया है। अगली बैठकों में नए आर्थिक आंकड़े, महंगाई की दिशा और मौद्रिक नीति के असर को देखकर निर्णय होगा। फिलहाल घोषित कदम तीन नीति दरों की बढ़ोतरी है; अगली बढ़ोतरी को तय फैसला बताना उचित नहीं होगा।

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Updated: 11 सितम्बर 2026, 00:08 IST