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ईयू के मसौदा इस्पात कोटे में भारत को 16.41 लाख टन की जगह, एफटीए हिस्सा अभी लागू नहीं

बंदरगाह पर निर्यात के लिए रखी इस्पात कॉइलों का प्रतीकात्मक दृश्य

नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026: ईयू इस्पात कोटा अभी मसौदे में है। यूरोपीय संघ और भारत के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के सार्वजनिक मसौदे में भारतीय इस्पात के लिए सालाना 16,41,470 टन का देश-विशेष कोटा तय किया गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी मात्रा पर आज से नई रियायत मिलने लगी है। समझौते का पाठ अभी कानूनी समीक्षा और हस्ताक्षर की प्रक्रिया में है।

कुल कोटे की दो अलग व्यवस्थाएँ

दस्तावेज में 9,46,616 टन सामान्य सर्वाधिक अनुकूल देश (एमएफएन) हिस्से और 6,94,853 टन एफटीए से जुड़े हिस्से के रूप में दर्ज हैं। दोनों को जोड़ने पर लगभग 16.41 लाख टन बनते हैं। इसलिए केवल 6.95 लाख टन को भारत का पूरा कोटा समझना भी गलत होगा। एफटीए वाला अतिरिक्त हिस्सा समझौता प्रभावी होने की शर्तों से जुड़ा है।

कोटे में हॉट-रोल्ड और कोल्ड-रोल्ड शीट, कोटेड शीट, स्टेनलेस स्टील, सरिया, वायर रॉड और पाइप जैसे कई उत्पाद वर्ग शामिल हैं। सबसे बड़ा देश-विशेष हिस्सा हॉट-रोल्ड शीट और स्ट्रिप के लिए 5,09,605 टन बताया गया है। इसमें 2,99,197 टन एमएफएन और 2,10,408 टन एफटीए से संबंधित हैं। उत्पाद के हिसाब से अलग सीमा होने के कारण एक वर्ग का बचा हुआ कोटा दूसरे वर्ग में अपने आप नहीं जुड़ता।

निर्यातकों के लिए असली फर्क क्या होगा?

यूरोपीय संघ की इस्पात आयात व्यवस्था में शुल्क-मुक्त मात्रा की समग्र सीमा सालाना 1.83 करोड़ टन रखी गई है। देश और उत्पाद के हिसाब से आवंटन होने पर भारतीय निर्यातक उपलब्ध कोटे के भीतर प्रवेश की योजना बना सकेंगे। हालांकि कोटा मिल जाना किसी कंपनी के निर्यात ऑर्डर, बिक्री या लाभ की गारंटी नहीं है। कीमत, गुणवत्ता, मूल-स्थान के नियम और यूरोपीय खरीदारों की मांग भी मायने रखेगी।

मसौदे में यह भी प्रावधान है कि जहाँ भारत के लिए अलग कोटा है, वहाँ कुछ अतिरिक्त मात्रा प्रतिस्पर्धी आवंटन से मिल सकती है। जिन उत्पादों में अलग भारतीय हिस्सा नहीं है, वहाँ पात्र निर्यातकों के लिए साझा या शेष कोटे का रास्ता हो सकता है। इन व्यवस्थाओं का वास्तविक इस्तेमाल यूरोपीय संघ के प्रशासनिक नियमों और उस समय उपलब्ध मात्रा पर निर्भर करेगा।

हस्ताक्षर और लागू होने की तारीख अहम

भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 में व्यापार वार्ता पूरी होने की घोषणा की थी। यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रकाशित पाठ जानकारी के लिए है और कानूनी समीक्षा में बदल सकता है। हस्ताक्षर तथा दोनों पक्षों की घरेलू प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद ही समझौता बाध्यकारी बनेगा। इसलिए मसौदे के एफटीए कोटे को मौजूदा लागू सुविधा बताकर व्यापारिक निर्णय लेना जल्दबाजी होगी।

दस्तावेज के अनुसार, समझौता प्रभावी होने के एक साल बाद कोटे की पहली समीक्षा शुरू करने और उसके बाद हर पाँच साल में समीक्षा का प्रस्ताव है। भारतीय इस्पात कंपनियों के लिए अगला महत्वपूर्ण पड़ाव अंतिम पाठ, प्रभावी तारीख और उत्पादवार कोटा प्रशासन की आधिकारिक घोषणा होगी।