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भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7% हुआ, महंगाई और दरों पर बनी चिंता

भारत की जीडीपी वृद्धि की खबर के लिए उद्योग और घरेलू व्यापार का सांकेतिक चित्र

भारत की जीडीपी वृद्धि को लेकर S&P ग्लोबल रेटिंग्स का आकलन बेहतर हुआ है, लेकिन महंगाई और ब्याज दरों की चुनौती बनी हुई है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 का वृद्धि अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया है। यह 0.4 प्रतिशत अंक का संशोधन है। इसका आधार जून तिमाही में उम्मीद से मजबूत आर्थिक गतिविधियाँ हैं।

नई एशिया-प्रशांत आर्थिक रिपोर्ट 23 सितंबर की सुबह भारतीय समय के अनुसार सामने आई थी। इसमें पूरे वित्त वर्ष, यानी 31 मार्च 2027 तक की अवधि का अनुमान दिया गया है। इसे भारत की पहले से हासिल सालाना वृद्धि या सरकारी लक्ष्य समझना सही नहीं होगा। अंतिम परिणाम आने वाली तिमाहियों के उत्पादन, मांग और निवेश पर निर्भर करेगा।

भारत की जीडीपी वृद्धि: अगले तीन साल का अनुमान

वित्त वर्ष वृद्धि का अनुमान पिछले आकलन से बदलाव
2026-27 7% 6.6% से बढ़ाया
2027-28 7.2% बरकरार
2028-29 7% बरकरार

इस संशोधन को क्रेडिट रेटिंग में बदलाव भी नहीं माना जाना चाहिए। रिपोर्ट आर्थिक संभावनाओं का आकलन है; इसमें देश की रेटिंग बदलने की घोषणा नहीं की गई है। वृद्धि अनुमान और क्रेडिट रेटिंग अलग बातें हैं, इसलिए सात प्रतिशत का नया आँकड़ा अपने आप किसी रेटिंग उन्नयन का संकेत नहीं बनता।

ब्याज दर बढ़ने की संभावना, फैसला नहीं

एजेंसी को चालू वित्त वर्ष में औसत उपभोक्ता महंगाई 5.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उसका आकलन है कि RBI नीतिगत दर में 25 आधार अंक, यानी 0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि कर सकता है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष के अंत का दर अनुमान 5.5 प्रतिशत है। ये पूर्वानुमान हैं; इन्हें RBI की घोषित दर या सभी कर्जों की तत्काल नई ब्याज दर नहीं कहा जा सकता।

घरेलू मांग की मजबूती के साथ पश्चिम एशिया का संघर्ष, ऊर्जा लागत और मौसम के जोखिम नीति की दिशा के लिए अहम रहेंगे। अधिक महंगा तेल उद्योगों की लागत पर दबाव डाल सकता है। इसलिए तेज विकास का अनुमान होने के बावजूद कीमतों से जुड़ी चिंता समाप्त नहीं होती।

मजबूती कहाँ से आई, आगे निगाह किस पर

जून तिमाही में उद्योग, उपभोग, वस्तुओं के निर्यात और सरकारी निवेश ने अनुमान सुधारने में भूमिका निभाई। रिपोर्ट में उस तिमाही की सालाना आर्थिक वृद्धि 7.8 प्रतिशत बताई गई है, जबकि उससे पिछली तिमाही में यह 8.6 प्रतिशत थी। रफ्तार थोड़ी कम होने पर भी गतिविधियाँ एजेंसी की पहले की अपेक्षा से बेहतर रहीं।

आगे दूसरी छमाही में कर बदलावों से मिले शुरुआती सहारे का असर कम पड़ने पर गति नरम हो सकती है। रिपोर्ट ने बारिश की कमी के कारण कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई पर निगरानी की जरूरत भी बताई है। वृद्धि के इस आकलन को पढ़ते समय मुख्य अंतर यही है: उत्पादन बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है, पर मौसम, ऊर्जा और महंगाई से जुड़ी शर्तें अब भी परिणाम बदल सकती हैं।