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कल्पतरु प्रोजेक्ट्स को ₹2,025 करोड़ का काम, तीन कारोबारों में नए ऑर्डर

कल्पतरु प्रोजेक्ट्स: बिजली, निर्माण और पाइपलाइन की सांकेतिक तस्वीर

कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल को बिजली ढाँचे, भवन-कारखानों और तेल-गैस परियोजनाओं में लगभग ₹2,025 करोड़ का नया काम मिला है। कंपनी ने 24 सितंबर 2026 को बताया कि इसमें भारत और विदेशी बाजारों से प्राप्त ऑर्डर तथा ठेका मिलने की सूचनाएँ शामिल हैं। इन घोषणाओं के साथ चालू वित्त वर्ष में अब तक हासिल ऑर्डरों का मूल्य ₹13,219 करोड़ हो गया है।

इस अपडेट की अहम बात तीन अलग कारोबारों में नए काम का जुड़ना है। कंपनी ने परियोजनाओं की कुल राशि बताई है, लेकिन किस ग्राहक से कितना काम मिला, किस देश में कौन-सा प्रोजेक्ट बनेगा और उसे कब पूरा करना होगा, इसका अलग-अलग विवरण इस विज्ञप्ति में नहीं दिया गया है।

कल्पतरु प्रोजेक्ट्स को कहाँ मिला नया काम?

कारोबार घोषणा में जानकारी
बिजली पारेषण और वितरण टीएंडडी कारोबार की परियोजनाएँ
भवन और कारखाने बीएंडएफ कारोबार से जुड़े प्रोजेक्ट
तेल एवं गैस तेल-गैस कारोबार की परियोजनाएँ
नए ऑर्डरों की कुल राशि लगभग ₹2,025 करोड़
वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक प्राप्त ऑर्डर ₹13,219 करोड़

कंपनी ने एक्सचेंजों को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि ये ऑर्डर सामान्य कारोबारी गतिविधियों के दौरान मिले हैं। कुल राशि में अलग-अलग क्षेत्रों और बाजारों का काम शामिल है; इसे किसी एक परियोजना का मूल्य समझना सही नहीं होगा।

₹12,000 करोड़ की संभावनाएँ अभी अलग हैं

प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष मोहनोट के मुताबिक, कंपनी ₹12,000 करोड़ से अधिक के अतिरिक्त ऑर्डरों के लिए अनुकूल स्थिति में है या एल1 है। एल1 का मतलब आम तौर पर सबसे कम बोली लगाने वाला पात्र बोलीदाता होता है। इस स्थिति और अंतिम रूप से ऑर्डर प्राप्त होने के बीच फर्क है।

इसलिए ₹12,000 करोड़ से अधिक की इस संभावित राशि को प्राप्त ऑर्डरों के ₹13,219 करोड़ में जोड़कर नया सुनिश्चित कुल बताना उचित नहीं होगा। प्रबंधन ने इसे भविष्य के काम की संभावना और लक्षित वृद्धि के प्रति अपने भरोसे के रूप में पेश किया है। यह सभी संबंधित ठेके मिल जाने की पुष्टि नहीं है।

कारोबार का आकार और आगे की नजर

कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण, यानी ईपीसी, क्षेत्र में काम करती है। कंपनी के परिचय के अनुसार उसका वैश्विक विस्तार 75 देशों तक है। वह बिजली ढाँचे के अलावा जल आपूर्ति, रेलवे, शहरी परिवहन, राजमार्ग और हवाईअड्डों जैसे क्षेत्रों में भी सेवाएँ देती है।

इसी विज्ञप्ति में कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 का राजस्व लगभग ₹27,143 करोड़ बताया है। साथ ही 30 से अधिक देशों में 250 से ज्यादा परियोजनाओं पर काम चलने की जानकारी दी है। भारत में उसकी दो विनिर्माण इकाइयाँ पारेषण टावर, भारी धातु संरचनाएँ और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ढाँचे बनाती हैं।

नए ऑर्डर भविष्य के काम की उपलब्धता बढ़ाते हैं, लेकिन उनकी पूरी रकम तत्काल बिक्री या लाभ नहीं बन जाती। आगे परियोजनाओं के क्रियान्वयन, लागत और भुगतान की प्रगति देखनी होगी। फिलहाल पुष्ट घोषणा नए काम की राशि और कारोबारों से जुड़ी है; परियोजनावार मुनाफे का अनुमान जारी नहीं किया गया है।