मंगलुरु, 14 सितंबर। दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह कोरगा के कई परिवारों को आवास की स्वीकृति के बाद भी पक्के घर नहीं मिल पाए हैं। निर्माण की बढ़ती लागत, जमीन के दस्तावेज, बैंक ऋण और ऑनलाइन प्रक्रिया जैसी अड़चनें सामने आई हैं।
दक्षिण कन्नड़ के एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) अधिकारी बसवराजू ने स्थानीय रिपोर्ट में कहा कि कोरगा परिवारों से आवास सहायता के 170 आवेदन मिले और सभी स्वीकृत हुए। उनके अनुसार करीब 30 प्रतिशत मकानों का निर्माण शुरू हुआ, जबकि केवल लगभग 5 प्रतिशत पूरे हुए। विभागीय आकलन में रसोई और शौचालय सहित बुनियादी 300 वर्ग फुट का मकान बनाने की लागत कम से कम आठ लाख रुपये बताई गई, जबकि उपलब्ध सहायता 4.5 लाख रुपये है। ये जिले की इस परियोजना से जुड़े आंकड़े हैं, पूरे कर्नाटक के नहीं।
गुंडापडवु और मालवूरू के कुछ परिवारों ने जमीन का मालिकाना दस्तावेज न होने या स्वीकृत राशि से निर्माण पूरा न हो पाने की समस्या बताई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरवाडे विनायक करभारी के मुताबिक पात्र परिवारों को ऋण दिलाने और गैर सरकारी संस्थाओं की मदद से निर्माण कराने के विकल्प देखे जा रहे हैं। उडुपी के ITDP अधिकारी ने बताया कि वहाँ स्वीकृत करीब 80 मकानों का काम शुरू नहीं हुआ है; स्थानीय न्यास और ग्राम पंचायत ने कुछ मकानों के निर्माण में मदद की है।
केंद्र सरकार के फरवरी 2026 के संसद में दिए उत्तर के अनुसार PM-JANMAN के तहत पूरे कर्नाटक में उस तारीख तक 1,070 आवास स्वीकृत और 75 पूरे हुए थे। इस पुराने राज्यव्यापी आंकड़े की तुलना सितंबर में बताई गई दक्षिण कन्नड़ की स्थानीय स्थिति से सीधे नहीं की जानी चाहिए।
