बेंगलुरु, 10 सितंबर 2026। कर्नाटक के कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की वापसी का रास्ता खुल गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने लंबे समय से लागू रोक हटाने की सिफारिशों को मंजूरी दी है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि चुनाव छात्रों की इच्छा पर होंगे। इनमें संबंधित संस्थान के नामांकित विद्यार्थी ही उम्मीदवार और मतदाता बन सकेंगे। मतदान की विस्तृत प्रक्रिया और कार्यक्रम अभी तय किया जाना बाकी है।
छात्रसंघ चुनाव पर फैसला किसका होगा?
सरकार ने चुनाव कराने का निर्णय विद्यार्थियों पर छोड़ा है। परमेश्वर के अनुसार, छात्र चुनाव चाहते हैं तो कॉलेज प्रबंधन उसे रोकने का फैसला नहीं कर सकता। यदि विद्यार्थी चुनाव नहीं चाहते, तो उन्हें आयोजित करना अनिवार्य नहीं होगा। इस व्यवस्था का घोषित उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व की क्षमता विकसित करना है।
मंत्रिमंडल का निर्णय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए है; स्कूल इसके दायरे में नहीं हैं। सरकार इसे इसी वर्ष लागू करना चाहती है। हालांकि चुनाव कब और किस प्रक्रिया से कराए जाएंगे, इसकी विस्तृत व्यवस्था बाद में घोषित होगी। इसलिए अभी किसी निश्चित मतदान तारीख को इस फैसले का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
संगठन की सदस्यता और बैनर में अंतर
चुनाव में राजनीतिक दलों या उनसे जुड़े छात्र संगठनों के बैनर का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि किसी छात्र संगठन का सदस्य भी उम्मीदवार बन सकता है, बशर्ते वह छात्र राजनीतिक समूह के बैनर तले चुनाव न लड़े। यह शर्त उम्मीदवार की संस्थागत छात्र पहचान और राजनीतिक संगठन के प्रचार को अलग रखती है।
सरकार ने जाति आधारित आरक्षण नहीं रखने का निर्णय भी बताया है। वहीं छात्राओं के प्रतिनिधित्व के लिए परिषद के कई पद निर्धारित किए गए हैं। इस तरह संगठन के नाम पर चुनाव लड़ने की पाबंदी और परिषद में महिलाओं की भागीदारी, दोनों प्रस्तावित ढांचे के अलग हिस्से हैं।
परिषद में कौन-कौन से पद होंगे?
- एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष; उपाध्यक्षों में एक महिला होगी।
- एक महासचिव और दो संयुक्त सचिव; संयुक्त सचिवों में एक महिला होगी।
- छह सदस्यों की कार्यकारिणी, जिसमें दो महिलाएं होंगी।
निर्णय से पहले मंत्री शरण प्रकाश पाटिल की अध्यक्षता वाली समिति ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का दौरा कर सरकार को रिपोर्ट दी थी। उसी विचार-विमर्श के बाद छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
अप्रैल में शुरू हुआ था परामर्श
इस साल बजट में छात्र चुनाव बहाल करने की घोषणा के बाद सरकार ने छात्र संगठनों के साथ बातचीत शुरू की थी। 22 अप्रैल को शरण प्रकाश पाटिल और तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर ने विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उस बैठक में लिंगदोह समिति की सिफारिशों को आधार बनाने और वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार कुछ बदलाव करने की बात कही गई थी।
परामर्श के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने चुनाव जल्द कराने, छात्राओं के लिए पद रखने और परिषदों को उपयोगी अधिकार देने की मांग की थी। अब मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अगला घोषित कदम चुनाव की विस्तृत व्यवस्था तय करना है। राज्य में परिसर में हिंसा और झड़पों के बाद 1989 में छात्र चुनावों पर रोक लगाई गई थी।
