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महाराष्ट्र की सहकारी मिलों को रियायती ऋण मंजूर, पुराने गन्ना भुगतान पर नजर

सहकारी चीनी मिल और गन्ना खेत का सांकेतिक दृश्य

महाराष्ट्र में सहकारी चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का दबाव कम करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने 15 सितंबर को रियायती ऋण देने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 2025–26 पेराई सत्र के लंबित उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के भुगतान और 2026–27 सत्र की तैयारी के लिए मिलों को सॉफ्ट लोन देने की मंजूरी मिली।

किसान को पैसा कब मिलेगा

यह ऋण मिलों के लिए है। इससे मिलों को नकदी उपलब्ध होने और किसानों का बकाया चुकाने में मदद मिल सकती है, लेकिन किसी किसान के खाते में भुगतान होने की तारीख इस निर्णय से अपने आप तय नहीं होती। किसान अपनी मिल से 2025–26 का तौल रिकॉर्ड, भुगतान पर्ची और शेष FRP की लिखित स्थिति लें। मंजूर ऋण की शर्तें, पात्र मिलों की सूची और वितरण की समय-सीमा जारी होने पर ही भुगतान के असर का आकलन होगा।

राज्य सरकार ने 2 सितंबर को प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने रखने का निर्देश दिया था। 15 सितंबर का फैसला उस प्रस्ताव से आगे की स्वीकृति है। मिलों का अगला पेराई सत्र अक्टूबर में शुरू होना है; तैयारी के लिए कार्यशील पूंजी और पुराने बकाये का निपटारा दोनों जरूरी हैं।

FRP का अर्थ

FRP गन्ने के लिए केंद्र द्वारा तय न्यूनतम भुगतान मानक है। 2026–27 चीनी सत्र के लिए केंद्र ने बुनियादी 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर 365 रुपये प्रति क्विंटल का FRP मंजूर किया है; रिकवरी बढ़ने या घटने पर निर्धारित समायोजन लागू होगा। नई दर 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सत्र की खरीद पर लागू है। इसे पिछले सत्र के बकाये की दर से न मिलाएं।

मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद वास्तविक ऋण वितरण, मिलों की पात्रता और किसानों को बकाये की अदायगी पर नजर रखना अगला कदम है। किसान भुगतान न मिलने पर संबंधित मिल और जिला गन्ना कार्यालय में अपने रिकॉर्ड के साथ स्थिति पूछ सकते हैं।