देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ की प्रमुख शर्तें अब सामने आ गई हैं। 11 सितंबर 2026 की सुबह जारी इश्यू विवरण के मुताबिक NSE IPO प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू ₹1 है। आम निवेशकों के लिए बोली 17 सितंबर को खुलेगी और 21 सितंबर को बंद होगी, जबकि एंकर निवेशकों के लिए आवंटन 16 सितंबर को प्रस्तावित है।
यह पेशकश लंबे समय से प्रतीक्षित थी, इसलिए तारीखों और प्राइस बैंड की पुष्टि बाजार के लिए बड़ा घटनाक्रम है। निवेशकों के लिए अब सबसे जरूरी बात इश्यू की संरचना समझना है, क्योंकि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इससे जुटने वाली रकम कंपनी के कारोबार में नई पूंजी के रूप में नहीं जाएगी।
प्राइस बैंड और बोली की तारीखें
इश्यू के लिए ₹1,700 निचला और ₹1,785 ऊपरी भाव तय किया गया है। बोली 17 सितंबर से 21 सितंबर तक स्वीकार की जाएगी। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार शेयरों के आवंटन को 22 सितंबर तक अंतिम रूप दिया जा सकता है। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिलेंगे, उनके लिए रिफंड प्रक्रिया 23 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। सफल आवेदकों के डीमैट खाते में शेयर भी 23 सितंबर को आने का कार्यक्रम है। सूचीबद्धता की संभावित तारीख 24 सितंबर रखी गई है।
8 शेयर का लॉट, किस श्रेणी के लिए कितना हिस्सा
एक लॉट में 8 शेयर होंगे और इसके बाद बोली 8 के गुणक में लगाई जा सकेगी। निचले प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹13,600 और ऊपरी भाव पर ₹14,280 की जरूरत होगी। इश्यू का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा पात्र संस्थागत खरीदारों के लिए रखा जा सकता है। कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा गैर-संस्थागत निवेशकों और कम से कम 35 प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए निर्धारित है। अंतिम आवंटन मांग और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
OFS का आकार क्यों घटा
पेशकश में लगभग 12.644 करोड़ मौजूदा शेयर बेचे जाने हैं, जो कंपनी की करीब 5.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। पहले लगभग 14.89 करोड़ शेयर, यानी करीब 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना थी। संशोधित आकार बताता है कि बेचने वाले शेयरधारकों ने पेशकश के लिए उपलब्ध शेयरों की संख्या घटाई है। ऊपरी प्राइस बैंड पर इश्यू का अनुमानित मूल्य करीब ₹22,570 करोड़ और निचले भाव पर करीब ₹21,495 करोड़ बैठता है। वास्तविक राशि अंतिम निर्गम मूल्य और आवंटन पर निर्भर करेगी।
बिक्री करने वाले प्रमुख शेयरधारकों में भारतीय स्टेट बैंक, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड शामिल हैं। कुछ शेयरधारकों ने पहले प्रस्तावित मात्रा के मुकाबले बिक्री घटाई है।
पैसा कंपनी को क्यों नहीं मिलेगा
पूरे इश्यू के OFS होने का अर्थ है कि एनएसई नए शेयर जारी नहीं कर रहा। बिक्री से प्राप्त राशि उन मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी जो अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी को इस आईपीओ से सीधे नई पूंजी नहीं मिलेगी। इसलिए इश्यू का मूल्यांकन करते समय निवेशकों को केवल कुल रकम नहीं, बल्कि शेयरधारिता में बदलाव और एक्सचेंज के कारोबार की वित्तीय स्थिति भी देखनी चाहिए।
निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए
प्राइस बैंड तय होना आवेदन का स्वतः संकेत नहीं है। निवेशकों को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में वित्तीय प्रदर्शन, नियामकीय जोखिम, मुकदमों, आय के स्रोत और ऑफर फॉर सेल से जुड़े विवरण पढ़ने चाहिए। सूचीबद्धता लाभ की कोई गारंटी नहीं होती और गैर-आधिकारिक ग्रे मार्केट संकेत निवेश निर्णय का भरोसेमंद आधार नहीं माने जा सकते। अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार निर्णय लेना जरूरी है।
आगे की समयरेखा
16 सितंबर की एंकर बुक के बाद 17 सितंबर को सार्वजनिक बोली शुरू होगी। 21 सितंबर को इश्यू बंद होने, 22 सितंबर को आवंटन तय होने और 24 सितंबर को शेयर बाजार में प्रवेश का कार्यक्रम है। किसी नियामकीय या परिचालन बदलाव की स्थिति में तारीखें बदल सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले अंतिम इश्यू दस्तावेज और आधिकारिक कार्यक्रम देखना उचित होगा।



