All India · English
▤   All IndiaDesh Ki AawajThe complete pictureNational edition
⌖ All India

पीएम विश्वकर्मा के तीन साल: 30 लाख पंजीकरण, प्रशिक्षण और औजार वितरण का ब्यौरा

लकड़ी पर काम करते कारीगर और आधुनिक औजारों का सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली/कोलकाता, 18 सितंबर 2026। पारंपरिक कारीगरों के लिए शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना के तीन वर्ष पूरे होने पर केंद्र ने पंजीकरण, प्रशिक्षण, औजार और ऋण सहायता के आंकड़े साझा किए हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अनुसार देशभर में 30 लाख लाभार्थियों का पंजीकरण हुआ है। इनमें लगभग 24.50 लाख ने बुनियादी कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये आंकड़े अलग-अलग चरणों की प्रगति बताते हैं; पंजीकरण को प्रशिक्षण या ऋण मिलने के बराबर नहीं समझना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कोलकाता के धनो धान्यो सभागार में तीसरी वर्षगांठ के कार्यक्रम में बताया कि इंडिया पोस्ट के माध्यम से 18.15 लाख आधुनिक टूलकिट पहुंचाए गए हैं। उनके मुताबिक 6.18 लाख कारीगरों को एक लाख रुपये तक के रियायती ऋण मिले, जिनकी कुल राशि 5,297 करोड़ रुपये है। मंत्रालय ने इन ऋणों की ब्याज दर पांच प्रतिशत सालाना बताई है। योजना का उद्देश्य कौशल, औजार, संस्थागत ऋण और बाजार से जुड़ाव के जरिए परंपरागत पेशों को सहारा देना है।

पश्चिम बंगाल में आवेदन और अमल

मंत्रालय के मुताबिक पश्चिम बंगाल मई 2026 में योजना के क्रियान्वयन से जुड़ा। राज्य में सात लाख से अधिक आवेदन आने की जानकारी कार्यक्रम में दी गई। आवेदन संख्या को मंजूर लाभार्थियों की संख्या नहीं माना जा सकता। राज्य सरकार ने पात्र कारीगरों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रक्रिया तेज करने और केंद्र के साथ समन्वय करने की बात कही।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के कारीगरों की कला और उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगी। कुछ लाभार्थियों को पहचान पत्र, प्रमाणपत्र, टूलकिट और एक-एक लाख रुपये के चेक दिए गए। मंत्रालय के अनुसार विभिन्न जिलों से दो हजार से अधिक कारीगर और पंचायत प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए। केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने महिला उद्यमियों के लिए उपलब्ध अवसरों पर जोर दिया।

अगली कसौटी क्या है

यह योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी। तीन वर्ष के आंकड़ों से प्रशिक्षण और सहायता की पहुंच का पता चलता है, जबकि आय, कारोबार या रोजगार में कितना स्थायी सुधार हुआ, इसका मूल्यांकन इन आंकड़ों से अकेले नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल में हाल में शुरू हुए क्रियान्वयन के बाद आवेदनों की जाँच, प्रशिक्षण पूरा होने और वास्तव में औजार तथा ऋण मिलने की प्रगति अलग से देखनी होगी।