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सत्य निकेतन हादसा: हाईकोर्ट ने गंभीर लापरवाही पर जताई चिंता, पीजी संचालक कर चुका है आत्मसमर्पण

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले में पीजी संचालक शुभम त्यागी ने शुक्रवार 11 सितंबर को पटियाला हाउस अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा। छह सितंबर के इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी।

पुलिस के अनुसार, त्यागी हादसे के बाद से तलाश में थे। मामले में दूसरे पीजी संचालक समेत अन्य आरोपियों से भी पूछताछ चल रही है। जांचकर्ता इमारत में हुए मरम्मत और निर्माण कार्य की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। हादसे की वजह और किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

अपडेट, 18 सितंबर: दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हादसे को साधारण दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे गंभीर लापरवाही और कथित आपराधिक आचरण से जुड़ा मामला बताया। अदालत ने दिल्ली में पीजी और हॉस्टल व्यवस्था की सुरक्षा पर चिंता जताई और कहा कि छोटे शहरों से पढ़ाई तथा करियर के लिए आने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

अदालत की टिप्पणियाँ जाँच की दिशा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी हैं; आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।

उत्तर परिसर में 56 पीजी को नोटिस

सत्य निकेतन हादसे के बाद रूप नगर थाना पुलिस ने कमला नगर, मलका गंज और बंगला रोड क्षेत्र के कम से कम 56 पीजी संचालकों को सुरक्षा और संचालन से जुड़े दस्तावेज देने के नोटिस जारी किए हैं। मांगे गए रिकॉर्ड में लागू होने पर अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्वीकृत भवन योजना, पूर्णता/अधिभोग प्रमाणपत्र, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र, कमरों की मंजिलवार क्षमता, कर्मचारियों का सत्यापन, सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड और पिछले 15 दिन का आगंतुक रजिस्टर शामिल हैं।

पुलिस ने अनधिकृत मंजिल, बेसमेंट, मेजेनाइन, कमरे या व्यावसायिक उपयोग का विवरण भी मांगा है। दस्तावेज न देने या गलत रिकॉर्ड मिलने पर मामला नागरिक एजेंसियों को सीलिंग या अन्य कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है। यह नोटिस जाँच प्रक्रिया का हिस्सा है; किसी विशेष पीजी पर उल्लंघन सिद्ध होने का दावा नहीं किया जा रहा।