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शाहजादपुर मंडी में धान की तुलाई संबंधी आदेश पर आपत्ति, नमी कटौती की जांच की मांग

धान मंडी में नमी माप और तुलाई पर बात करते किसानों का सांकेतिक दृश्य

हरियाणा धान खरीद, 13 सितंबर 2026। अंबाला जिले की शाहजादपुर मंडी में सरकारी खरीद शुरू होने से पहले धान की झराई, तुलाई और भराई को लेकर जारी बताए गए निर्देश पर सवाल उठे हैं। पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीरेन्द्र लाठर ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर आदेश की समीक्षा और धान के दाम से कथित कटौतियों की जांच की मांग की है। आरोपों पर सरकारी निष्कर्ष या संबंधित अधिकारियों का जवाब अभी उपलब्ध नहीं है।

मंडी के निर्देश से क्या प्रभावित हो सकता है?

लाठर ने 11 सितंबर को मार्केट कमेटी शाहजादपुर के नाम से जारी कार्यालय आदेश का उल्लेख किया है। उनके अनुसार इसमें आढ़तियों और खरीद केंद्रों को सरकारी खरीद शुरू होने तक अपनी फर्म पर जीरी की झराई, तुलाई और भराई नहीं करने को कहा गया है। निर्देश का उल्लंघन करने वाले आढ़ती के विरुद्ध कार्रवाई की बात भी बताई गई। उन्होंने आशंका जताई कि इसका असर शुरुआती उपज लेकर आने वाले किसानों की बिक्री व्यवस्था पर पड़ सकता है। आदेश की वास्तविक लागू सीमा और अवधि को मंडी प्रशासन से स्पष्ट करना जरूरी है।

हरियाणा में धान की फसल जल्दी तैयार होने और सरकारी खरीद की तारीख आगे लाने की मांग पहले से चल रही है। खरीद की तैयारियों और तारीख पर पिछली रिपोर्ट में यही स्थिति दर्ज है। इस बीच मंडी में खरीद से पहले कौन सा काम किसे करने की अनुमति है, इसकी स्पष्ट जानकारी किसानों और आढ़तियों दोनों के लिए उपयोगी होगी।

नमी के आधार पर दाम घटाने का दावा

लाठर ने अपने पत्र और सार्वजनिक बयान में आरोप लगाया कि तय सीमा से अधिक नमी बताकर कुछ व्यापारी समर्थन मूल्य से करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम देते हैं। उनके उदाहरण में 19 प्रतिशत नमी वाले एक क्विंटल धान को सुखाने से वजन लगभग दो किलोग्राम घटे तो उसका मूल्य करीब 50 रुपये बनता है। उन्होंने इस उदाहरण और कथित 300 रुपये की कटौती के अंतर की जांच चाही है। यह उनके दिए अनुमान हैं, किसी मंडी में प्रत्येक सौदे का सत्यापित रिकॉर्ड नहीं। नमी माप, सुखाई, वास्तविक वजन और भुगतान की पर्चियों से ही किसी खास बिक्री की जांच हो सकती है।

उन्होंने सरकारी खरीद के दौरान आकस्मिक शुल्क के नाम पर किसानों से कथित वसूली का मुद्दा भी उठाया। मांग है कि कौन सा शुल्क खरीद एजेंसी देगी और किस मद की रकम किसान से ली जा सकती है, यह नियम सरल हिंदी में जारी करके मंडी की दुकानों पर प्रदर्शित किए जाएँ। उन्होंने 12 सितंबर को कृषि मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड को ईमेल से शिकायत भेजने की बात कही है।

किसानों के लिए दाम, वजन, नमी माप और किसी भी कटौती का लिखित विवरण संभालकर रखना अहम है। इस शिकायत के आधार पर अभी किसी व्यापारी या अधिकारी की गलती सिद्ध नहीं हुई है; आगे प्रशासन की जांच और जवाब से स्थिति साफ होगी।