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शिपकी ला व्यापार पर IGST छूट की मांग फिर उठी, किन्नौर के कारोबारियों ने केंद्र को लिखा

शिमला, 16 सितंबर 2026। किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने शिपकी ला के रास्ते होने वाले पारंपरिक सीमा व्यापार को IGST से छूट देने की मांग फिर उठाई है। एसोसिएशन ने वित्त मंत्रालय, GST परिषद सचिवालय और CBIC से मामला 7 अक्टूबर को प्रस्तावित GST परिषद बैठक में रखने का आग्रह किया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष हिशे नेगी का कहना है कि शिपकी ला का व्यापार सामान्य बंदरगाहों से होने वाले वाणिज्यिक आयात जैसा नहीं है। यह ऐतिहासिक रूप से सीमावर्ती समुदायों का पारंपरिक विनिमय आधारित व्यापार रहा है, जिसमें नियमित अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था के बजाय वस्तुओं का आदान-प्रदान प्रमुख रहा है।

शिपकी ला से व्यापार अगस्त में सात साल बाद दोबारा शुरू हुआ था, लेकिन IGST लागू होने के बाद एक सप्ताह के भीतर ही ठप पड़ गया। स्थानीय व्यापारियों ने कर बोझ को अव्यावहारिक बताते हुए आगे माल ले जाने से इनकार किया।

व्यापारियों ने जुलाई 1996 की सीमा व्यापार संबंधी सीमा शुल्क अधिसूचना और GST लागू होने के बाद हुए बदलावों के संदर्भ में नीति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऊँचाई, सीमित मौसम, कठिन मार्ग, खच्चरों और पारंपरिक ढुलाई पर निर्भरता तथा क्वारंटीन जैसी सुविधाओं की कमी के कारण शिपकी ला मार्ग को विशेष परिस्थितियों में देखा जाना चाहिए।