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सिक्किम के रिम्बी में पुनर्वास पर विचार, मानसून के बाद भूवैज्ञानिक सर्वे की तैयारी

28 सितंबर 2026 का अपडेट: लगातार भूस्खलन से प्रभावित रिम्बी में सुरक्षित पुनर्वास की जरूरत पर विचार हो रहा है। 27 सितंबर को सामने आए विवरण में सिक्किम के आपदा राहत आयुक्त रिनजिंग चेवांग ने कहा कि बार-बार ढलान खिसकने के कारण गांव रहने के योग्य नहीं रह सकता। इसे गांव को औपचारिक रूप से रहने के अयोग्य घोषित कर दिए जाने का अंतिम आदेश न समझें।

25 सितंबर को क्षेत्र का निरीक्षण करने वाले आयुक्त के अनुसार, ग्राम प्रशासन केंद्र के राहत शिविर में 107 लोग रह रहे थे। सिंगलिटाम के नौ घर भी खाली कराकर वहां के निवासियों को अलग राहत शिविर में भेजा गया। मानसून के बाद विभिन्न विशेषज्ञों की टीम से भूवैज्ञानिक सर्वे कराने की बात कही गई है।

यह राहत शिविर में मौजूद लोगों की संख्या है। नीचे दिया 14 सितंबर का 128 लोगों की निकासी का आंकड़ा अलग तारीख और संदर्भ का है; दोनों को जोड़कर नई कुल संख्या निकालना उचित नहीं होगा।

25 सितंबर और उससे पहले की स्थिति

25 सितंबर 2026 का अपडेट: सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिम्बी क्षेत्र में लगातार बारिश से भूस्खलन और मलबे का बहाव बढ़ा है। 25 सितंबर की जानकारी के अनुसार, 32 घर और चार सरकारी क्वार्टर खतरे की जद में हैं। रिम्बी–युक्सम और रिम्बी–खेचेओपलरी मार्ग बंद बताए गए हैं। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन से रास्ते की ताजा स्थिति लें।

सिंगलिटाम की ढलान से नीचे आते मलबे ने बस्तियों और सड़क संपर्क को प्रभावित किया है। कई परिवार राहत शिविरों या रिश्तेदारों के यहाँ रह रहे हैं। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शुक्रवार को स्थिति गंभीर बताते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के निर्देश दिए।

निकासी का पुराना आंकड़ा किस तारीख का है

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 15 सितंबर की विज्ञप्ति में बताया गया था कि 14 सितंबर की बारिश के बाद रिम्बी के 28 घरों के 128 लोगों को ग्राम पंचायत केंद्र पहुँचाया गया। सिंगलिटाम के सात परिवार भी राहत आश्रय में स्थानांतरित किए गए थे। यह पहले की निकासी का आंकड़ा है; इसे 25 सितंबर की नई निकासी या कुल नुकसान का आंकड़ा नहीं समझें।

प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी

प्राधिकरण ने सक्रिय भूस्खलन स्थल, जमा मलबे और तेज बहाव वाले नालों से दूर रहने की सलाह दी है। अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षित स्थान या राहत केंद्र जाएँ। जमीन में नई दरार, ढलान खिसकने या पानी के बहाव में अचानक बदलाव की सूचना स्थानीय प्रशासन को दें।