उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती बढ़ने की शिकायतों के बीच 13 सितंबर को राज्य में अधिकतम मांग और उपलब्ध बिजली के बीच 3,650 मेगावाट का अंतर दर्ज किया गया। यूपी स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के हवाले से उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार मांग 28,834 मेगावाट और उपलब्धता 25,184 मेगावाट थी। यह पूरे दिन की आपूर्ति का आँकड़ा नहीं, उस दिन दर्ज मांग-उपलब्धता की स्थिति है।
राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 18 घंटे के रोस्टर की तुलना में औसत आपूर्ति 16 घंटे 41 मिनट बताई गई है। यह राज्यस्तरीय औसत है; किसी एक जिले या गांव में कटौती की अवधि अलग हो सकती है। स्थानीय तकनीकी खराबियाँ भी आपूर्ति को प्रभावित कर रही हैं। ग्रामीण उपभोक्ताओं ने विशेष रूप से रात की कटौती पर चिंता जताई है।
पावर कॉरपोरेशन के अनुसार बारिश और जलभराव से कोयला खदानों से निकासी तथा संयंत्रों तक आपूर्ति प्रभावित हुई है। कई तापीय इकाइयों के बंद रहने से बिजली उपलब्धता घटी। 11 सितंबर को भी उत्पादन में कमी और ग्रामीण रात की कटौती की सूचना सामने आई थी। कॉरपोरेशन का कहना है कि कोयले और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता के लिए संबंधित एजेंसियों से समन्वय जारी है। उपभोक्ता अपने क्षेत्र की तय आपूर्ति और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी स्थानीय बिजली कार्यालय से लें।