उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रसूता की मृत्यु के मामलों की समीक्षा 24 घंटे के भीतर करने का निर्देश दिया है। पहले यह समीक्षा सप्ताह में एक बार की जाती थी। विभाग का कहना है कि त्वरित जाँच से इलाज और रेफरल व्यवस्था में हुई चूक का पता लगाकर उसी जिले में सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने निर्देश दिया कि बार-बार मातृ मृत्यु के मामले सामने आने वाले जिलों में विशेष ध्यान दिया जाए। समीक्षा में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सकों के प्रशिक्षण की भी योजना है।
यह आदेश 10–11 सितंबर की रिपोर्टों में सामने आया। किसी व्यक्तिगत मामले की जाँच या दोष तय होने की सूचना इससे नहीं निकलती; हर मृत्यु के कारण की अलग समीक्षा होगी।
