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मास्टर टैलेंट का FEMA मामला कंपाउंड, ₹1.77 लाख भुगतान से संबंधित जाँच समाप्त

मास्टर टैलेंट कंपाउंडिंग खबर के लिए विदेशी निवेश रिपोर्टिंग का सांकेतिक चित्र

मास्टर टैलेंट एडुसर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के विदेशी निवेश से जुड़ी रिपोर्टिंग में देरी के मामले का कंपाउंडिंग के जरिए निपटारा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय की 25 सितंबर 2026 की जानकारी के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक ने ₹1,77,310 के एकमुश्त भुगतान के साथ संबंधित FEMA उल्लंघनों को कंपाउंड किया है। जिन उल्लंघनों का निपटारा हुआ है, उनके संबंध में जाँच और आगे की कार्यवाही समाप्त हो गई है।

RBI का कंपाउंडिंग आदेश 17 सितंबर 2026 का है। ED ने इसकी जानकारी 25 सितंबर को सार्वजनिक की। इसलिए आदेश की तारीख और उसकी सार्वजनिक जानकारी की तारीख अलग हैं। मामला विदेशी आवक रकम, FC-GPR और विदेशी देनदारियों व परिसंपत्तियों की वार्षिक रिपोर्टिंग में देरी से संबंधित है।

मास्टर टैलेंट मामले में कौन-सी रिपोर्टिंग देर से हुई?

ED की विज्ञप्ति में विभिन्न नियमों के तहत सात प्रकार की रिपोर्टिंग देरी का उल्लेख है। इनमें विदेशी आवक रकम के लिए ARF, FC-GPR फॉर्म और Annual Return on Foreign Liabilities and Assets यानी FLA की रिपोर्टिंग शामिल है। जिन चार मदों में रकम दी गई है, उनका विवरण इस प्रकार है:

रिपोर्टिंग की मद संबंधित रकम
ARF: FEMA 20/2000-RB के तहत ₹6,22,95,502.50
ARF: FEMA 20(R)/2017-RB के तहत ₹6,81,79,973.75
FC-GPR: FEMA 20/2000-RB के तहत ₹6,22,95,461
FC-GPR: FEMA 395/2019-RB के तहत ₹94,47,633

ये संबंधित रिपोर्टिंग उल्लंघनों से जुड़ी राशियां हैं। इन्हें कंपाउंडिंग की रकम या निवेशकों को हुए नुकसान के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए। विभिन्न फॉर्म और प्रावधानों में दर्ज रकम जोड़कर कुल स्वतंत्र विदेशी निवेश का आंकड़ा निकालना भी इस विज्ञप्ति के आधार पर उचित नहीं है। इसमें ऐसा कोई समेकित निवेश आंकड़ा घोषित नहीं किया गया है।

ED की जाँच से RBI के आदेश तक क्या हुआ?

एजेंसी के अनुसार, विश्वसनीय जानकारी मिलने के बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत जाँच शुरू की गई थी। इसके बाद कंपनी ने उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए RBI के सामने आवेदन किया। यह प्रक्रिया FEMA, 1999 की धारा 15 के तहत अपनाई गई।

RBI से संदर्भ मिलने पर ED ने कंपाउंडिंग पर अपनी अनापत्ति दी। इसके आधार पर रिजर्व बैंक ने 17 सितंबर को आदेश जारी किया। विज्ञप्ति में एकमुश्त भुगतान की सटीक राशि ₹1,77,310 बताई गई है। इसे लगभग ₹1.77 लाख कहा जा सकता है, लेकिन दस्तावेज में दर्ज रकम समझने के लिए पूरा आंकड़ा महत्वपूर्ण है।

कार्यवाही समाप्त होने का दायरा क्या है?

ED ने स्पष्ट किया है कि जाँच और आगे की कार्यवाही का समापन उन्हीं उल्लंघनों के संबंध में हुआ है जिन्हें कंपाउंड किया गया है। इस जानकारी को कंपनी से जुड़े हर संभावित विषय या किसी असंबंधित मामले पर व्यापक निष्कर्ष की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।

विज्ञप्ति में विदेशी आवक रिपोर्टिंग और वार्षिक विवरण दाखिल करने में देरी का विवरण दिया गया है। किसी निवेशक के नुकसान, राशि की जब्ती या गिरफ्तारी की घोषणा इसमें नहीं है। मामले की प्रमुख नई स्थिति संबंधित रिपोर्टिंग उल्लंघनों का निपटारा और उनके लिए चल रही कार्यवाही का समाप्त होना है।