पूरा भारत · हिन्दी
▤   पूरा भारतदेश की आवाज़पूरी तस्वीरराष्ट्रीय संस्करण
⌖ पूरा भारत

असम के गोलपारा में 24 घंटे के नोटिस पर घर गिराने से हाईकोर्ट नाराज, आगे की कार्रवाई रोकी

गुवाहाटी: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के गोलपारा जिले में 24 घंटे का नोटिस देकर कई आवासीय घर गिराए जाने पर सवाल उठाया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया कार्रवाई को अवैध और अनधिकृत बताते हुए अगली सुनवाई तक संबंधित जमीनों पर आगे की कार्रवाई रोक दी।

21 निवासियों ने दी चुनौती

न्यायमूर्ति देवाशीष बरुआ 7 सितंबर को 21 निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं ने असम सरकार, गोलपारा के उपायुक्त और मटिया राजस्व सर्किल के अधिकारी के खिलाफ अदालत का रुख किया था। उन्हें 5 सितंबर को नोटिस देकर अपनी कृषि भूमि पर बने घर 24 घंटे में हटाने को कहा गया था।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि 7 सितंबर की सुबह घर गिरा दिए गए और प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। हाईकोर्ट ने पूछा कि ऐसी कौन-सी आसन्न आपदा थी जिसके कारण निजी जमीन पर इतनी कठोर और त्वरित कार्रवाई जरूरी हो गई।

सरकार से तत्कालता का कारण बताने को कहा

अदालत ने राज्य के वकील को गोलपारा के उपायुक्त और सर्किल अधिकारी से निर्देश लेकर यह बताने को कहा कि ध्वस्तीकरण की तत्काल आवश्यकता किस आधार पर तय की गई। निवासियों को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर गिराए गए घरों और कथित नुकसान का विवरण रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी गई।

पीठ ने असम कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजन के लिए पुनर्वर्गीकरण और हस्तांतरण का विनियमन) अधिनियम, 2015 का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि एक बीघा तक कृषि भूमि पर अपने लिए अधिकतम दो मंजिला आवास बनाने के कुछ मामलों में उपायुक्त की अनुमति जरूरी नहीं होती। हालांकि, पीठ ने अभी यह अंतिम निर्णय नहीं दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं के मकान हर कानूनी शर्त को पूरा करते थे।

मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर के लिए तय की गई थी। उपलब्ध रिपोर्ट में उस दिन के बाद का अंतिम आदेश शामिल नहीं है, इसलिए रोक और अदालत की टिप्पणियों को अंतरिम स्थिति के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।