शिलांग: मेघालय हाईकोर्ट ने शिलांग जिला जेल के निरीक्षण में ऐसे 17 विदेशी नागरिक पाए हैं जो अपनी निर्धारित सजा पूरी करने के बाद भी जेल में थे। अदालत ने राज्य से विदेशी नागरिकों के लिए उपलब्ध डिटेंशन सेंटर का विवरण एक सप्ताह के भीतर देने को कहा है।
15 बांग्लादेशी, एक म्यांमार और एक नाइजीरियाई नागरिक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन 17 लोगों में 15 बांग्लादेशी और म्यांमार व नाइजीरिया के एक-एक नागरिक शामिल हैं। म्यांमार के नागरिक को सजा पूरी हुए दस वर्ष से अधिक हो चुके हैं, जबकि एक बांग्लादेशी नागरिक चार वर्ष से अधिक अतिरिक्त समय जेल में रहा। अन्य लोग छह महीने से दो वर्ष तक की अवधि से सजा पूरी होने के बाद भी बंद बताए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति वानलुरा डिएंगदोह की पीठ ने जेल का दौरा कैदियों की स्थिति, सुविधाओं और कानूनी सहायता की उपलब्धता देखने के लिए किया था। अदालत के सामने पहले यह जानकारी रखी गई थी कि केवल एक बांग्लादेशी नागरिक सजा पूरी होने के एक वर्ष बाद भी जेल में है। निरीक्षण में अलग स्थिति मिलने पर पीठ ने उस जानकारी को भ्रामक और गलत बताया।
अनुच्छेद 21 और मुआवजे का सवाल
जेल महानिरीक्षक ने अदालत को बताया कि सजा पूरी कर चुके विदेशी नागरिकों को प्रत्यर्पण या निर्वासन तक रखने के लिए राज्य में डिटेंशन सेंटर नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि तय सजा के बाद हिरासत जारी रहना कानून के अनुरूप नहीं है और संविधान के अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। पीठ ने संकेत दिया कि उचित चरण पर मुआवजे के प्रश्न पर भी विचार किया जाएगा।
यह मामला राज्य की जेल व्यवस्था, विदेशी नागरिकों के प्रत्यर्पण और सजा पूरी होने के बाद वैधानिक हिरासत प्रबंध के बीच समन्वय की कमी को सामने लाता है। राज्य के जवाब के बाद आगे की व्यवस्था और संबंधित बंदियों की स्थिति पर अदालत का रुख स्पष्ट होगा।