बिहार में मखाना उगाने और उसकी बिक्री से जुड़े कामों के लिए 2026–27 का नया बजट मंजूर हुआ है। 15 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में केंद्रीय क्षेत्र की मखाना विकास योजना के कार्यान्वयन, राशि निकासी और खर्च के लिए लगभग 89.80 करोड़ रुपये को स्वीकृति दी गई। यह योजना के कुल कामकाज के लिए मंजूरी है; इसे हर किसान के खाते में मिलने वाली रकम समझना ठीक नहीं होगा।
तालाब से बाजार तक क्या बदल सकता है
योजना में बेहतर बीज, उत्पादकों का प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता प्रमाणन, पैकेजिंग और विपणन जैसे काम प्रस्तावित हैं। मखाना की खेती में उत्पादन के बाद सुखाने, भूनने और ग्रेडिंग की व्यवस्था भी कीमत पर असर डालती है। किस जिले में कौन सी सुविधा शुरू होगी और किसान उत्पादक संगठनों को किस तरह मदद मिलेगी, यह कार्यान्वयन निर्देश आने पर स्पष्ट होगा। किसानों को आवेदन या अनुदान का दावा करने से पहले कृषि विभाग की आधिकारिक पात्रता और समय-सीमा देखनी चाहिए।
तेल पाम और जल संसाधन
मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रीय खाद्य तेल–ऑयल पाम मिशन के अंतर्गत बिहार में खेती को बढ़ावा देने के लिए 2.10 करोड़ रुपये के खर्च को भी मंजूरी दी है। यह राज्यस्तरीय स्वीकृति है, किसी एक खेत या किसान के लिए तय भुगतान नहीं। तेल पाम लंबे समय की फसल है; पौधा लगाने से पहले स्थानीय जलवायु, पानी, पौध उपलब्धता और खरीद व्यवस्था के बारे में जिला कृषि कार्यालय से जानकारी लेना जरूरी है।
जल संसाधन विभाग को आकस्मिकता निधि से 1,000 करोड़ रुपये अग्रिम देने का निर्णय बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और संबंधित कार्यों के लिए हुआ है। यह 15 सितंबर को बाढ़ प्रभावित परिवारों को भेजी गई 579.23 करोड़ रुपये की राहत राशि से अलग वित्तीय फैसला है। किसान अपने इलाके की परियोजना, फसल नुकसान के आकलन और राहत भुगतान के बारे में जिला प्रशासन से अलग-अलग जानकारी लें। बाढ़ राहत और खेतों के नुकसान के आकलन की जानकारी अलग पढ़ें।
बैठक में कुल 17 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। बजट की मंजूरी के बाद योजनाओं की वास्तविक सुविधा, आवेदन और लाभार्थी चयन के निर्देश जारी होने पर ही किसान के लिए अगला कदम तय होगा।



