केरल के कृषि विभाग ने विभिन्न जिलों के लगभग 100 किसानों को कृषि ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण और पायलट लाइसेंस दिलाने की योजना बताई है। कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने वायनाड के पुथुरवयाल में आयोजित कृषि तकनीक बैठक में कहा कि यह काम राज्य सरकार के 100 दिन के कार्यक्रम के अंतर्गत होगा। विभाग एक मान्यता प्राप्त रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठन के साथ मिलकर प्रशिक्षण देगा।
किसान को किस कौशल की जरूरत होगी
ड्रोन से खेत की निगरानी और उपयुक्त परिस्थिति में छिड़काव की सेवा दी जा सकती है, लेकिन मशीन उड़ाने से पहले सुरक्षा, स्थानीय उड़ान नियम, बैटरी और छिड़काव सामग्री के प्रयोग की प्रशिक्षण प्रक्रिया जरूरी है। मंत्री ने प्रशिक्षण के साथ लाइसेंस का उल्लेख किया है; अभी आवेदन पत्र, चयन की तारीख और जिला कोटा अलग से घोषित नहीं किया गया। किसान केवल किसी अधिकृत प्रशिक्षण की सूचना पर ही फीस या दस्तावेज दें।
वायनाड में एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने आधुनिक उपकरणों को उत्पादन और लाभ बढ़ाने के लिए उपयोग करने की बात कही। उनका उद्देश्य तकनीक को खेत की वास्तविक जरूरत से जोड़ना है। सीमित खेत, तेज हवा या बरसात में ड्रोन सेवा की उपयोगिता अलग होगी; हर फसल पर समान लाभ का दावा उचित नहीं।
स्कूलों में कृषि क्लब की तैयारी
कृषि मंत्री के अनुसार अगले शैक्षणिक वर्ष में राज्य के 500 स्कूलों में कृषि क्लब शुरू करने की योजना भी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को खेती से परिचित कराना है। यह घोषणा और कार्यान्वयन की तैयारी है; सभी स्कूलों में क्लब शुरू हो चुके हैं, ऐसा दावा नहीं किया गया।
प्रशिक्षण लेने के इच्छुक किसान जिला कृषि कार्यालय से आधिकारिक चयन और लाइसेंस की प्रक्रिया पूछें। ड्रोन से सेवा देने के लिए ग्राहक, फसल और मौसम के अनुसार सुरक्षित संचालन तथा लागत का हिसाब भी समझें।



