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बाबूजी की आखिरी बेंच: सम्मान और रिश्तों की एक मार्मिक कहानी

मौलिक काल्पनिक कहानी — 11 सितंबर नगर परिषद के लिफाफे पर लगी लाल मुहर देखकर देव ने सबसे पहले तारीख गिनी। खाली करने के लिए बाईस दिन थे। इतने में दुकान का सामान बिक सकता था, मकान के बंटवारे के कागज पूरे हो सकते थे और वह सोमवार तक शहर की नौकरी पर लौट सकता […]

देश की आवाज़
11 सितम्बर 2026, 00:00 IST
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अम्मा की नीली कॉपी: एक खाली खाने में छिपी पूरी जिंदगी

यह एक मौलिक काल्पनिक कहानी है। अम्मा की तेरहवीं के अगले दिन निखिल ने तय किया कि वह शाम की बस से शहर लौट जाएगा। दफ्तर से लगातार फोन आ रहे थे। मकान का सामान समेटने के लिए उसने एक कबाड़ी बुला लिया था। लोहे का संदूक, पीतल की पुरानी थाली, बिना जोड़ी की कुर्सियाँ—जो […]

देश की आवाज़
10 सितम्बर 2026, 22:06 IST