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लंपी के साथ एफएमडी पर भी नजर रखें: पशुओं का छह महीने वाला टीकाकरण रिकॉर्ड जांचें

गाय के खुर की जांच करते पशु चिकित्सक और पास खड़ा पशुपालक

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। लंपी त्वचा रोग की खबरों के बीच डेयरी किसान खुरपका-मुंहपका, यानी एफएमडी, की नियमित रोकथाम भी जारी रखें। दोनों वायरल रोग अलग हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में एफएमडी के प्रति संवेदनशील पशुओं का छह महीने के अंतराल पर सामूहिक टीकाकरण प्रमुख उपाय है। बीमारी के लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक को सूचना और संदिग्ध पशु को अलग रखना भी जरूरी है।

एफएमडी से किस पशु को नुकसान

गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे दो खुर वाले पशु एफएमडी से प्रभावित हो सकते हैं। विभाग के अनुसार यह तेजी से फैलने वाला रोग है। दूध उत्पादन और पशु की वृद्धि घट सकती है; प्रजनन क्षमता तथा बैलों की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। झुंड में रोग फैलने से देखभाल का खर्च और उत्पादन हानि बढ़ती है। इसलिए केवल मौत की खबर न होने को जोखिम खत्म होना नहीं समझना चाहिए।

मुंह, थन और खुर के संकेत

बुखार, मुंह से बहुत लार गिरना, जीभ या मसूड़ों पर फफोले, थन में घाव तथा खुरों के बीच छाले एफएमडी के संभावित संकेत हैं। पशु चारा छोड़ सकता है या चलने में परेशानी दिखा सकता है। ऐसे लक्षण किसी अन्य बीमारी में भी हो सकते हैं, इसलिए घर पर अनुमान लगाकर रसायन या दवा लगाने के बजाय नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल अथवा पंजीकृत पशु चिकित्सक से जांच कराएं।

झुंड में फैलाव कैसे घटाएं

संदिग्ध पशु को स्वस्थ झुंड से तुरंत अलग रखें। उसके पानी-चारे के बर्तन, रस्सी और उपकरण साझा न करें। पशुशाला साफ और सूखी रखें तथा चिकित्सकीय सलाह से सफाई व कीटाणुशोधन करें। खरीदे हुए नए पशु को सीधे झुंड में मिलाने से पहले उसकी स्वास्थ्य जांच कराएं। संक्रमित क्षेत्र से पशुओं की अनावश्यक आवाजाही रोकना आसपास के पशुपालकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

टीकाकरण का छह महीने वाला चक्र

राष्ट्रीय कार्यक्रम में संवेदनशील पशुओं के एफएमडी टीके छह महीने के अंतराल पर लगाने की व्यवस्था है। ईयर टैग, पंजीकरण संख्या और टीकाकरण की तारीख दर्ज रखें, ताकि अगली खुराक न छूटे। स्थानीय पशुपालन कार्यालय से टीकाकरण शिविर और उपलब्ध सुविधा की जानकारी लें। बीमार या बुखार वाले पशु को टीका देने का समय पशु चिकित्सक तय करें।

लंपी के लक्षण अलग हैं

लंपी में शरीर पर गांठें या उभरे त्वचा घाव दिख सकते हैं और इसके फैलाव में कीट वाहकों की भूमिका होती है। एफएमडी में मुंह तथा खुर के घाव प्रमुख होते हैं। एक रोग का टीका दूसरे से सुरक्षा नहीं देता। दूध अचानक घटे, तेज बुखार हो या कई पशुओं में समान लक्षण दिखें तो स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी को तुरंत बताएं। समय पर सूचना से जांच और बचाव जल्दी शुरू किया जा सकता है।