पूरा भारत · हिन्दी
▤   पूरा भारतदेश की आवाज़पूरी तस्वीरराष्ट्रीय संस्करण
⌖ पूरा भारत

G4 ने सुरक्षा परिषद में दोनों श्रेणियों की सीटें बढ़ाने की माँग की, दिल्ली में होगी अगली समीक्षा

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक बैठक कक्ष का सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान के G4 समूह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने की माँग दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने 24 सितंबर को जारी संयुक्त बयान में बताया कि चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में हुई थी।

सुधार पर लिखित प्रस्तावों के आधार पर बातचीत की माँग

समूह अब सुरक्षा परिषद में बदलाव चाहने वाले अन्य देशों और समूहों के साथ मिलकर एक समेकित सुधार मॉडल तैयार करने की दिशा में सहयोग बढ़ाना चाहता है। मंत्रियों ने किसी लिखित प्रस्ताव के आधार पर औपचारिक बातचीत शुरू करने को प्राथमिकता बताया।

यह बयान परिषद में नई सीटों की मंजूरी या किसी देश को स्थायी सदस्यता मिलने की घोषणा नहीं है। इसमें चारों देशों ने सुधार के पक्ष में अपनी साझा कूटनीतिक स्थिति और आगे की बातचीत का एजेंडा रखा है।

भारत के साथ कौन-कौन शामिल था

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ब्राज़ील के माउरो विएरा, जर्मनी के योहान डेविड वाडेफुल और जापान के मोतेगी तोशिमित्सु शामिल हुए। उन्होंने पिछले महासभा सत्र में सुरक्षा परिषद सुधार पर चली अंतरसरकारी वार्ता की समीक्षा की।

चारों मंत्रियों का आकलन है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत बढ़ गई है। उन्होंने वर्तमान ढांचे को आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की बात कही।

अफ्रीका और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों पर जोर

G4 ने अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का समर्थन किया। समूह के अनुसार, सुधार में स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों को शामिल करना जरूरी है। बयान में इस रुख के समर्थन में सदस्य देशों के बहुमत का दावा किया गया है।

मंत्रियों ने अफ्रीकी समूह की ओर से पिछले सत्र में पेश सुधार मॉडल का स्वागत किया। उन्होंने परिषद में अफ्रीका की भागीदारी बढ़ाने, विशेषकर स्थायी श्रेणी में प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में अपना समर्थन दोहराया।

वार्ता की धीमी प्रगति पर असंतोष

संयुक्त बयान में अंतरसरकारी वार्ता प्रक्रिया के 18 वर्षों के बावजूद ठोस नतीजे नहीं निकलने पर चिंता जताई गई। G4 ने लिखित प्रस्ताव पर बातचीत शुरू होने से पहले पेश किए गए समझौता-सूत्र पर भी आपत्ति व्यक्त की। समूह का कहना है कि उसमें दोनों श्रेणियों के विस्तार के पक्ष में मौजूद विचारों को पर्याप्त स्थान नहीं मिला।

मंत्रियों ने सुधार पर चर्चा को केवल इसी वार्ता मंच तक सीमित रखने की आवश्यकता नहीं मानी। उन्होंने महासभा सहित अन्य मंचों पर व्यापक सदस्यता के साथ संवाद की इच्छा जताई।

अगला पड़ाव नई दिल्ली

चारों देश महासभा के 81वें सत्र में करीबी समन्वय जारी रखेंगे। अधिकारियों को बैठक की चर्चा पर आगे काम करने और नई दिल्ली में होने वाली अगली महानिदेशक स्तर की बैठक में प्रगति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

उस बैठक की तारीख इस बयान में नहीं दी गई है। फिलहाल अगला ठोस कदम साझा सुधार मॉडल और लिखित प्रस्तावों पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अन्य समर्थक समूहों के साथ सहयोग जुटाना है।