गोरखपुर के कौड़ीराम ब्लॉक के मेरौली गांव में नीतू पासवान किसानों के खेतों में ड्रोन से तरल खाद और अनुमत दवाओं का छिड़काव करने की सेवा दे रही हैं। उनके अनुसार 2024 में प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने यह काम शुरू किया। शुरुआत में मशीन चलाना और सेवा जुटाना आसान नहीं था, लेकिन अभ्यास के बाद अब नियमित काम मिलता है।
कमाई का दावा और वास्तविक खर्च
नीतू का कहना है कि काम वाले महीने में लगभग 50–60 हजार रुपये की आय हो जाती है और सालभर में लगभग 5–6 लाख रुपये तक कमाई हुई है। ये उनके अपने बताए आंकड़े हैं; सेवा की फीस, खर्च और शुद्ध मुनाफे का अलग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी दूसरी महिला की संभावित आय को इसी रकम से तय नहीं करना चाहिए। काम की संख्या, मौसम, बैटरी, रखरखाव और यात्रा लागत के अनुसार आमदनी बदलती है।
ड्रोन से छिड़काव बड़े या दुर्गम खेत में समय बचा सकता है। खेत के आकार, हवा, उपकरण और दवा की मात्रा के अनुसार समय बदलता है। नीतू के अनुभव में कुछ खेतों में एक से डेढ़ एकड़ का छिड़काव लगभग 5–7 मिनट में हो सकता है; इसे हर खेत के लिए निश्चित अवधि न मानें। किसान छिड़काव से पहले फसल, दवा के लेबल, आवश्यक सुरक्षा दूरी और मौसम की स्थिति की पुष्टि करें।
योजना का दायरा
केंद्र की नमो ड्रोन दीदी योजना चुनिंदा महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि सेवाएं देने के लिए उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। सरकारी दिशा-निर्देशों में ड्रोन और संबंधित सामान की लागत पर 80 प्रतिशत तक, अधिकतम 8 लाख रुपये केंद्रीय सहायता का प्रावधान बताया गया था। यह सहायता समूह के उपकरण के लिए है, व्यक्तिगत संचालक की हर माह की कमाई या हर आवेदक को मिलने वाली निश्चित रकम नहीं। मूल स्वीकृत बजट 2023–24 से 2025–26 की अवधि का था; नए चयन या विस्तार की स्थिति स्थानीय प्रशासन से जाँचें।
नीतू का अनुभव गांव में तकनीकी सेवा का एक उदाहरण है। प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को अपने समूह की पात्रता, सुरक्षित उड़ान, किसान के साथ सेवा शुल्क और खर्च का लिखित हिसाब समझकर आगे बढ़ना चाहिए।



