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आटे से आगे बढ़ेगा आशीर्वाद: पाँच साल में उपभोक्ता खर्च ₹20,000 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य

आटा, चपाती, मसाले और सत्तू के साथ खाद्य कारोबार विस्तार का प्रतीकात्मक दृश्य

नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026: आईटीसी अपने खाद्य ब्रांड आशीर्वाद का दायरा आटे से आगे बढ़ाकर तैयार-करने-योग्य भोजन, फ्रोजन स्नैक्स और सत्तू जैसी श्रेणियों में फैलाना चाहती है। कंपनी के फूड्स डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं कार्यकारी निदेशक हेमंत मलिक के अनुसार, ब्रांड के उत्पादों पर उपभोक्ताओं का खर्च अभी ₹10,000 करोड़ से अधिक है और अगले पाँच वर्षों में इसे लगभग ₹20,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। यह कंपनी की आकांक्षा है, हासिल हो चुका कारोबार या घोषित बिक्री पूर्वानुमान नहीं।

आटे की पकड़ मजबूत, नई श्रेणियों में विस्तार

आशीर्वाद की शुरुआत 2002 में गेहूँ के आटे से हुई थी। अब ब्रांड में नियमित आटे के साथ मल्टीग्रेन, हाई-प्रोटीन, ऑर्गेनिक और मोटे अनाज वाले विकल्प हैं। मलिक के मुताबिक, कंपनी मूल आटा कारोबार को मजबूत रखने के साथ ऐसी खाद्य श्रेणियों में उतरना चाहती है जहाँ सुविधा, पोषण और स्थानीय पसंद के आधार पर मांग बढ़ सकती है।

विस्तार की योजना में बेसन, सेवई, रवा, सोया चंक्स, फ्रोजन नान और पराठे, तैयार चटनी और सांभर जैसे उत्पाद शामिल हैं। तैयार-करने-योग्य चपाती जैसे उत्पाद छोटे परिवारों और समय की कमी वाले उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर पेश किए जा रहे हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि आशीर्वाद उत्पादों का उत्पादन देशभर की 66 इकाइयों के नेटवर्क से होता है।

सत्तू को पूर्वी राज्यों से बाहर ले जाने की तैयारी

ब्रांड का नया जोर सत्तू पर भी है। आशीर्वाद चना सत्तू बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बाजारों में उतारा गया है। बिहार के लिए जीरा वाला और पश्चिम बंगाल तथा झारखंड के लिए सादा संस्करण उपलब्ध कराया गया है। मलिक ने कहा कि शुरुआती क्षेत्रीय बाजारों से आगे इसे देशभर में पहुँचाने की संभावना कंपनी देख रही है। अभी राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री की निश्चित तारीख या लक्ष्य घोषित नहीं हुआ है।

₹20,000 करोड़ का आंकड़ा क्या बताता है

यहाँ ‘उपभोक्ता खर्च’ को आईटीसी की शुद्ध बिक्री या मुनाफे से अलग समझना जरूरी है। उपभोक्ता द्वारा उत्पादों पर चुकाई जाने वाली कुल रकम में बिक्री मूल्य के साथ वितरण-श्रृंखला का मार्जिन और लागू कर भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए ₹10,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक पहुँचने की बात को सीधे कंपनी के राजस्व के दोगुना होने के बराबर नहीं माना जा सकता।

आने वाले वर्षों में इस लक्ष्य की प्रगति नई श्रेणियों की वास्तविक बिक्री, वितरण का विस्तार और उपभोक्ता मांग पर निर्भर करेगी। उपलब्ध बयान में प्रत्येक उत्पाद की बिक्री का अलग अनुमान या इस लक्ष्य तक पहुँचने की गारंटी नहीं दी गई है।