भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग व्यवस्था में जमा अतिरिक्त नकदी को संतुलित करने के लिए एक बड़ा कदम घोषित किया है। केंद्रीय बैंक सितंबर में तीन चरणों में कुल ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड खुले बाजार परिचालन यानी OMO के जरिए बेचेगा। पहली नीलामी 17 सितंबर को होगी, जबकि अगली दो नीलामियां 21 और 28 सितंबर के लिए रखी गई हैं।
पहले चरण में ₹50,000 करोड़ की बिक्री प्रस्तावित है। इसके बाद शेष ₹50,000 करोड़ को दो चरणों में बांटा जाएगा। पहली नीलामी में छह सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होंगी, जिनकी परिपक्वता मार्च 2029 से फरवरी 2032 के बीच है। हर नीलामी में प्राप्त बोलियों, बाजार की मांग और घोषित शर्तों के आधार पर अंतिम स्वीकृति तय होगी।
OMO बिक्री से बैंकिंग नकदी पर क्या असर पड़ेगा?
जब RBI सरकारी प्रतिभूतियां बेचता है, तब बैंक और दूसरे पात्र खरीदार इन बॉन्ड के बदले केंद्रीय बैंक को रुपये चुकाते हैं। इससे उतनी नकदी बैंकिंग तंत्र से बाहर चली जाती है। इसलिए यह प्रक्रिया नकदी बढ़ाने की जगह अतिरिक्त तरलता सोखने का साधन है। सितंबर के शुरुआती दिनों में बैंकिंग प्रणाली का अधिशेष ₹11 लाख करोड़ से ऊपर पहुंचने की खबरों के बाद यह घोषणा अहम मानी जा रही है।
अत्यधिक अधिशेष होने पर रातभर की बाजार दरें नीतिगत रेपो दर से काफी नीचे जा सकती हैं। OMO बिक्री के जरिए RBI छोटी अवधि की ब्याज दरों को अपने मौद्रिक नीति संकेत के आसपास रखने और सरकारी बॉन्ड बाजार में मांग-आपूर्ति का संतुलन सुधारने की कोशिश करता है।
तीन नीलामियों का कार्यक्रम
- 17 सितंबर: ₹50,000 करोड़ की पहली OMO बिक्री; छह सरकारी प्रतिभूतियां प्रस्तावित।
- 21 सितंबर: दूसरे चरण की बिक्री।
- 28 सितंबर: तीसरा और अंतिम चरण।
दूसरे और तीसरे चरण की अलग-अलग रकम तथा प्रतिभूतियों का विस्तृत ब्योरा संबंधित नीलामी सूचना में स्पष्ट होगा। कुल घोषित आकार तीनों चरण मिलाकर ₹1 लाख करोड़ है।
बॉन्ड यील्ड और बाजार पर संभावित प्रभाव
बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की अतिरिक्त आपूर्ति आने से बॉन्ड कीमतों पर कुछ दबाव और यील्ड पर ऊपर की ओर असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रतिक्रिया नीलामी की कट-ऑफ यील्ड, बैंकों की बोलियों, सरकारी खर्च के प्रवाह और विदेशी मुद्रा बाजार से आने-जाने वाली नकदी पर निर्भर करेगी। यदि मांग मजबूत रहती है तो असर सीमित भी रह सकता है।
इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि बैंक जमा या खुदरा कर्ज की ब्याज दरें तुरंत बदल जाएंगी। कर्ज और जमा दरों पर असर के लिए टिकाऊ नकदी स्थिति, नीति दर, बैंक की फंडिंग लागत और प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारक जिम्मेदार होते हैं। इसलिए ग्राहकों को केवल OMO घोषणा के आधार पर होम लोन, एफडी या अन्य उत्पादों की दरों में तत्काल बदलाव मानकर नहीं चलना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या देखना जरूरी है?
सरकारी बॉन्ड और डेट म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों को 17 सितंबर की पहली नीलामी में कुल बोलियों, RBI द्वारा स्वीकार रकम और कट-ऑफ यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। लंबी अवधि के बॉन्ड की कीमतें यील्ड में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। छोटे निवेशकों के लिए यह फैसला किसी सुनिश्चित लाभ या नुकसान का संकेत नहीं है; पोर्टफोलियो पर असर उसकी अवधि और प्रतिभूतियों के मिश्रण से तय होगा।
RBI की यह घोषणा बताती है कि केंद्रीय बैंक अब अधिशेष नकदी को चरणबद्ध तरीके से व्यवस्थित करना चाहता है। आने वाली तीनों नीलामियों के परिणाम से यह साफ होगा कि बैंकिंग तंत्र कितनी आसानी से इस बड़े तरलता-समायोजन को आत्मसात करता है।



