दक्षिण गुजरात बारिश, 13 सितंबर 2026। कई सप्ताह के विराम के बाद भरूच, नवसारी और डांग में बारिश से खेतों में नमी लौटी है। किसानों के लिए यह राहत का संकेत है, हालांकि एक दिन की वर्षा से पूरे मौसम की कमी दूर हुई मान लेना जल्दबाजी होगी। इसी दिन भारी बारिश के कारण कुछ शहरी निचले हिस्सों में पानी भी जमा हुआ।
अहमदाबाद मौसम केंद्र के 13 सितंबर दोपहर जारी बुलेटिन के अनुसार, सुबह 8:30 बजे तक के 24 घंटों में दक्षिण गुजरात के तापी जिले में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी, डांग, नर्मदा, सूरत और तापी में कहीं-कहीं बहुत भारी तथा भरूच और नवसारी सहित अन्य जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा दर्ज हुई। इस आधिकारिक क्षेत्रीय विवरण और नीचे दिए स्थानीय स्टेशन आँकड़ों की समय-सीमा थोड़ी अलग है।
डांग और भरूच में कितना पानी गिरा?
स्थानीय वर्षा विवरण के मुताबिक रविवार सुबह आठ बजे तक के पिछले 24 घंटों में डांग के सुबीर में 5.92 इंच, वघई में 5.63 इंच, आहवा में 4.5 इंच और सापुतारा में 2.73 इंच बारिश दर्ज की गई। नवसारी के वांसदा में करीब दो इंच पानी गिरा। ये अलग-अलग स्थानों के आँकड़े हैं; इन्हें पूरे जिले की औसत वर्षा न समझें।
भरूच जिले में रविवार को कम समय में तेज बरसात हुई। अंकलेश्वर में दो घंटे के दौरान लगभग ढाई इंच और भरूच शहर में दो इंच बारिश बताई गई। वालिया और झगड़िया में करीब डेढ़-डेढ़ इंच, जबकि वागरा, हांसोट और नेत्रंग में लगभग एक-एक इंच दर्ज हुआ। कसक, पांचबत्ती और स्टेशन रोड जैसे निचले शहरी इलाकों में जलभराव से आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई।
किसानों के लिए राहत और सावधानी
बारिश में लंबे अंतराल से फसलों की नमी को लेकर चिंता थी। अब हुई वर्षा से तत्काल सूखापन घट सकता है, लेकिन खेत में वास्तविक असर फसल की अवस्था, मिट्टी, जलनिकास और आगे मिलने वाली बारिश पर निर्भर करेगा। डांग के आहवा, सापुतारा, वघई और सुबीर में वर्षा का दायरा व्यापक रहा; खेतों में पानी ठहरने की स्थिति स्थानीय रूप से अलग हो सकती है। जलभराव वाले खेत की निकासी और बिजली के उपकरणों के आसपास सावधानी आवश्यक है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने गुजरात क्षेत्र में 13 सितंबर को कहीं-कहीं अत्यधिक भारी तथा 14 सितंबर को बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। भरूच, सूरत, नवसारी और वलसाड के लिए प्रादेशिक चेतावनी भी जारी हुई है। यह आगे के मौसम का पूर्वानुमान है, ऊपर दर्ज वर्षा का अवलोकन अलग है। नदी-नालों और जलभरे रास्तों से दूरी रखें तथा स्थानीय प्रशासन की ताजा चेतावनी देखते रहें।
दक्षिण के इन जिलों की ताजा बारिश को सौराष्ट्र-कच्छ के कम वर्षा वाले जिलों की स्थिति से नहीं मिलाना चाहिए। चार जिलों में कमी और सूखा आकलन अलग मुद्दा है। पूरे देश के लिए राज्यवार मौसम पूर्वानुमान में आगे की संभावित बारिश देखें।

